व्यापारी की रास्ते में मौत, परिजनों का सीएचसी अधीक्षक पर लापरवाही का गंभीर आरोप
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– नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की संवेदनहीनता: ऑक्सीजन सिर्फ 5 मिनट दी और रेफर!
– 65 वर्षीय कपड़ा व्यापारी की रास्ते में मौत, परिजनों का सीएचसी अधीक्षक पर लापरवाही का गंभीर आरोप

नवाबगंज / फर्रूखाबाद :- स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक और भयावह मामला नवाबगंज में सामने आया है। नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराए गए एक 65 वर्षीय कपड़ा व्यापारी, नन्हेलाल गुप्ता, को कथित तौर पर सिर्फ पाँच मिनट के लिए ऑक्सीजन दी गई और फिर यह कहकर लोहिया अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया कि “ऑक्सीजन खत्म हो गई है”। अस्पताल पहुँचने से पहले ही व्यापारी ने रास्ते में दम तोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला ?
नवाबगंज के पंचम गली निवासी कपड़ा व्यापारी नन्हेलाल गुप्ता (65) की दोपहर में अचानक तबियत बिगड़ी और ऑक्सीजन लेवल तेजी से कम होने लगा। पुत्र नितिन गुप्ता उन्हें तुरंत सीएचसी ले गए। नितिन गुप्ता के अनुसार, स्टाफ ने ऑक्सीजन लगाई, लेकिन सिर्फ पाँच मिनट बाद ही वह ऑक्सीजन खत्म हो गई।
पुत्र नितिन का आरोप: “मैंने स्टाफ से बार-बार गिड़गिड़ाकर और ऑक्सीजन देने का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने एक न सुनी और जबरन लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया। उन्होंने कहा कि आक्सीजन खत्म हो गई है, जबकि स्टॉक रूम में सिलेंडर मौजूद थे। अस्पताल की इसी लापरवाही और जल्दबाजी में रेफर करने की वजह से मेरे पिता की मौत हुई।”
लोहिया अस्पताल में हंगामा
जब नितिन गुप्ता अपने पिता को लेकर लोहिया अस्पताल पहुँचे, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इमरजेंसी में मृत अवस्था में शव देखकर पत्नी कुमोदनी देवी समेत परिजनों में कोहराम मच गया। गुस्साए परिजनों ने तुरंत सीएचसी अधीक्षक लोकेश शर्मा पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा किया।
सीएचसी अधीक्षक बोले
इस पूरे घटनाक्रम पर नवाबगंज सीएचसी के अधीक्षक लोकेश शर्मा ने अपनी सफाई दी है और परिजनों के सभी आरोपों को निराधार बताया है।
अधीक्षक शर्मा का दावा: “अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। मरीज की हालत काफी गंभीर थी, इसलिए उन्हें बेहतर इलाज के लिए लोहिया अस्पताल रेफर किया गया था। जिस एम्बुलेंस से मरीज को भेजा गया, उसमें भी ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध थी।”
बहरहाल, परिजनों ने सीएचसी अधीक्षक पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए हंगामा शांत होने के बाद शव लेकर घर प्रस्थान किया। इस हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर छोटे स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन प्रबंधन, स्टाफ की संवेदनशीलता और रेफर नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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