एनएसडी से निकलकर बड़े पर्दे पर कैसे छा गए गोविंद नामदेव ?चाय की दुकान पर काम, खुद उठाया स्कूली पढ़ाई का खर्च
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हिंदी फिल्मों में विलेन से लेकर सहायक अभिनेता के रूप में गोविंद नामदेव एक अलग पहचान रखते हैं। देर से हिंदी सिनेमा में कदम रखने के बावजूद उन्होंने दर्शकों को अपने अभिनय का कायल बनाया। एक खास बातचीत में गोविंद नामदेव ने अपने करियर और जिंदगी से जुड़ी कई रोचक और प्रेरणादायी बातें साझा की हैं।
कुछ कलाकार जब अपने संघर्ष की बात करते हैं तो उसमें बाकी लोगों के लिए प्रेरणा छिपी होती है। ऐसे ही कलाकार और बॉलीवुड के मशहूर विलेन गोविंद नामदेव भी हैं। उनकी जिंदगी की, संघर्ष की कहानी किसी फिल्म की तरह है। जानिए, कैसे मध्यप्रदेश के सागर के एक छोटे से लड़के ने मायानगरी मुंबई में अपने लिए अलग मुकाम बनाया ?

चाय की दुकान में काम करके बनाया स्कूली पढ़ाई का रास्ता
गोविंद नामदेव को बचपन से ही अव्वल आने का शौक हो गया था। चौथी और पांचवीं कक्षा में उन्होंने महात्मा गांधी, सुषाभ चंद्र बोस जैसे कई महान स्वतंत्रता सेनानियों पर लिखी या उनकी लिखी किताबें पढ़ीं। इन सभी से उन्हें बड़ा आदमी बनने की प्रेरणा मिली। गोविंद नामदेव कहते हैं, ‘मुझे बचपन में लगा कि ये सभी लोग दिल्ली जाकर बड़े बने थे। तो मैंने 6वीं कक्षा में मां और परिवार वालों से कहा कि दिल्ली जाकर पढ़ाई करनी है। वह हैरान हुए। लेकिन किसी तरह से मान गए। उन्होंने व्यवस्था की और कुछ पैसे दिए। मैं 7वीं की पढ़ाई का सपना लेकर दिल्ली आया, एक दोस्त के जानकर के घर पहुंचा लेकर उन्होंने मदद नहींं की।’
गोविंद नामदेव आगे कहते हैं, ‘खुद ही स्कूल तलाशने लगा। पैसे खत्म हो गए। एक दिन एक स्कूल अच्छा लगा। उस स्कूल के सामने एक स्टेशनरी और चाय की दुकान थी, वहां काम मांगा। चाय की दुकान पर भी काम करता था तो उसके जरिए सामने वाले स्कूल में गया। वहां एक टीचर से मदद मांगी उन्हें बोला कि पढ़ाई करनी है। टीचर जी ने सहायता की। फिर पढ़ाई के साथ काम भी करता रहा और अव्वल आता रहा। माता-पिता को जब अव्वल आने के बारे में बताया तो वह खुश हुए।’
स्कूली पढ़ाई के बाद एनएसडी में दाखिला और 12 साल नौकरी की
गोविंद नामदेव ने अपनी लगन और मेहनत से स्कूली पढ़ाई पूरी की। फिर कॉलेज की बारी आई लेकिन सोचने लगे कि काम करते हुए, कमाते हुए कॉलेज की पढ़ाई कैसे होगी। इसी दौरान उन्हें एनएसडी का एक एड दिखा, जिसमें स्कॉलरशिप की बात लिखी थी। गोविंद ने एनएसडी में दाखिल के बारे में बात करते हुए कहा, ‘मुझे लगा मन की मुराद पूरी हो गई। एनएसडी से कई दिग्गज कलाकार बॉलीवुड पहुंचे हैं, इसमें ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह जैसे अभिनेता शामिल हैं।’ नेशनल स्कूल ऑफ ड्रॉमा में पढ़ाई पूरी करने के बाद गोविंद नामदेव ने बॉलीवुड का रूख नहीं किया, पहले उन्होंने 12 साल एनएसडी में ही नौकरी की।
दिलीप साहब की तारीफ से मिली खुशी
90 के दशक में गोविंद नामदेव ने अपने करियर की शुरुआत बॉलीवुड में की। उन्होंने विलेन बनने की राह चुनी। गोविंद नामदेव कहते हैं, ‘मैं जब हिंदी सिनेमा में आया तो हीरो बनने की उम्र थी नहीं। तो मैंने विलेन बनने की राह चुनी। कई नेगेटिव रोल किए। शेखर कपूर ने फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में विलेन का रोल ऑफर किया तो मैंने तुंरत हामी भरी। इसके बाद तो कई पीछे मुड़कर नहीं देखा।’
गोविंद नामदेव के लिए सबसे ज्यादा खुशी और गर्व का पल वो था जब दिलीप साहब से तारीफ मिली। गोविंद नामदेव बताते हैं, ‘मैं दिलीप साहब को अपना गुरु मानता था। फिल्म ‘प्रेम ग्रंथ’ की रिलीज पर पहली तारीफ मुझे उनसे मिली थी। दिलीप साहब ने कहा था गोविंद वैरी गुड, शाबाश। दिलीप साहब को तारीफ करते देख मैं गदगद हो गया। फिर अमिताभ बच्चन से लेकर कई एक्टर्स ने मुझे जमकर सराहा।’
गोविंद नामदेव ने हिंदी सिनेमा में विलेन के अलावा कॉमेडी रोल भी खूब किए। टीवी सीरियल में भी अपने हुनर से दर्शकों का मनोरंजन किया। अब भी वह फिल्मों में सक्रिय हैं।
लीड रोल में जल्द नजर आएंगे गोविंद नामदेव
इस साल गोविंद नामदेव की लगभग सात फिल्में रिलीज होंगी। नई फिल्मों के बारे में वह कहते हैं, ‘इस साल मुझे दर्शक नए रूप में देखेंगे। मुझे इन सात फिल्मों का इंतजार है। मैं आपको लीड कैरेक्टर यानी सेंट्रल कैरेक्टर के तौर पर भी नजर आऊंगा।’
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