नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार का अगला सीएम कौन ?
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पटना :- होली के दिन पटना से दिल्ली और दिल्ली से पटना नेताओं की दौड़ बिहार में क्या कोई बड़ा उलटफेर का संकेत दे रहा है ? क्या सचमुच में बिहार के सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं ? क्या तीन महीने में बिहार में फिर से नई सरकार बनेगी ?
अगर मीडिया में चल रही खबरों में दम है तो फिर बिहार का अगला सीएम कौन होगा? कौन नीतीश कुमार की जगह लेगा ? क्या सम्राट चौधरी सीएम बनेंगे या फिर बीजेपी किसी और चेहरे को तलाश लिया है, जैसे एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पहले किया था ? अगर नीतीश नहीं तो फिर कौन? क्या नीतीश कुमार का बेटा निशांत कुमार डिप्टी सीएम बनेंगे ? जानिए नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के बाद कौन-कौन सीएम के दावेदार हैं और उनका दावा कितना मजबूत है ? बिहार में किस जाति के कितने विधायक हैं और बीजेपी क्या कोर वोटर्स को ध्यान में रखकर सीएम चेहरा घोषित करेगी ?
बीजेपी का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के आंकड़ों के अनुसार बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. जाति आधारित राजनीति के केंद्र बिहार में बीजेपी का सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला इस बार काफी सफल रहा है। ऐसे में अगर बीजेपी नीतीश कुमार की जगह पर अगर अपना सीएम बनाती है तो यह काफी कारगर होगा। बीजीपी के 89 विधायक जीतकर आए हैं। सबसे बड़ा EBC यानी अति पिछड़ा वर्ग और सवर्ण बीजेपी के विधायक हैं।
बीजेपी के टिकट पर किस जाति के कितने विधायक ?
बीजेपी के टिकट पर सवर्ण (Upper Caste) लगभग 35-38 सीटें जीते हैं।ओबीसी (OBC) और ईबीसी (EBC) लगभग 32-35 सीटें जीते हैं। एनडीए ने सवर्ण जातियों में सबसे अधिक टिकट राजपूत जाति को दिए थे। इस बार की विधानसभा में सबसे अधिक संख्या राजपूत विधायकों की होगी। एनडीए में 33 विधायक सवर्ण हैं, जिसमें ज्यादातर बीजेपी के हैं। इस बार 28 यादव जाति के विधायक जीत कर आए हैं, जिसमें 15 एनडीए से जीते हैं। इस बार राजपूत, यादव और ब्राह्मण जाति के अलावा 25 कुर्मी, 23 कुशवाहा, 26 बनिया, 23 भूमिहार, तीन कायस्थ, अन्य पिछड़ी जातियों के 13 विधायक चुने गए हैं, जिसमें ज्यादातर एनडीए के हैं।
कोइरी, राजपूत या फिर ईबीसी बनेगा बीजेपी का सीएम फेस ?
अगर इस लिहाज से देखें तो बिहार में राजपूत जाति के ज्यादातर विधायक हैं। खास बात यह है कि इसमें ज्यादातर बीजेपी के हैं। ऐसे में राजपूत चेहरा अगर सीएम बन जाए तो हैरानी नहीं होगी। लेकिन कोइरी और कुर्मी समीकरण पर अगर बीजेपी जाएगी तो सम्राट चौधरी सबसे ताकतवर बनकर उभरेंगे। इस बार कोइरी सीएम बनेगा और कुर्मी यानी सीएम नीतीश कुमार का बेटे निशांत कुमार डिप्टी सीएम । एक डिप्टी सीएम भूमिहार जाति से विजय सिन्हा बन सकते हैं।
निशांत कुमार की एंट्री, क्या बनेंगे डिप्टी सीएम ?
नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार, जो अब तक राजनीति से पूरी तरह दूर थे, उनकी सक्रियता ने सबको चौंका दिया है। जेडीयू के बड़े नेताओं ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि निशांत पार्टी में शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार अपने उत्तराधिकारी के तौर पर निशांत को तैयार कर रहे हैं। मुमकिन है कि बीजेपी के साथ हुए किसी आंतरिक समझौते के तहत निशांत को उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) का पद दिया जाए, ताकि जेडीयू का अपना कोर वोट बैंक (कुर्मी-कोइरी) एकजुट रहे।
बीजेपी का ‘सरप्राइज’ फैक्टर, कौन बनेगा सीएम ?
बीजेपी का हालिया ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वह स्थापित चेहरों के बजाय चौंकाने वाले नाम सामने लाती है, जैसा हमने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में देखा। अगर बीजेपी ‘पुराने फॉर्मूले’ पर चलती है, तो इन 5 नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा है।
सम्राट चौधरी :- वर्तमान डिप्टी सीएम और बिहार बीजेपी का बड़ा ओबीसी (कोइरी) चेहरा। सम्राट चौधरी ने नीतीश के खिलाफ अपनी आक्रामकता से पार्टी में बड़ी जगह बनाई है । अगर बीजेपी सामाजिक समीकरणों को साधती है, तो वे सबसे प्रबल दावेदार हैं
नित्यानंद राय :- केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और अमित शाह के करीबी। यादव समुदाय से आने वाले नित्यानंद राय को बीजेपी बिहार में लालू यादव के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए सीएम की कुर्सी सौंप सकती है।
विजय कुमार सिन्हा :- वर्तमान में डिप्टी सीएम हैं और सवर्ण (भूमिहार) समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं. विधानसभा में उनकी पकड़ और संगठन में अनुभव उन्हें रेस में बनाए रखता है।
राजीव प्रताप रूडी :- सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी भी अगर सीएम बन जाएं तो हैरानी नहीं होगी। क्योंकि बिहार में राजपूत जाति बीजेपी को इस बार जमकर वोट किया है। लेकिन इनके लिए निगेटिव प्वाइंट यह है कि बगल के राज्य यूपी में पहले से ही एक राजपूत सीएम योगी आदित्यनाथ हैं।
कोई नया चेहरा (डार्क हॉर्स) : – बीजेपी आलाकमान राजस्थान के भजनलाल शर्मा, एमपी में डॉ मोहन यादव या छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय की तरह किसी ऐसे विधायक या एमएलसी का नाम आगे बढ़ा सकता है जिसकी चर्चा मीडिया में न हो। इसमें रेणु देवी या जनक राम या केंद्र में ईबीसी के एक मंत्री राजभूषण चौधरी जैसे नाम भी शामिल हो सकते हैं जो दलित या अति पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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