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मनीष ने तो इस्तीफा दे दिया किंतु इनसे कोई सवाल करेगा?

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कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इन नेताओं और उनपर आरोपों की सूची जारी करते हुए लिखा है, हमेशा से सोचता रहा हूं कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा का क्या मतलब है। लगता है वे सिर्फ गोमांस की बात कर रहे थे।

  1. नारायण राणे – 300 करोड़ के मनी लांडरिंग रैकेट के आरोपी – केंद्रीय मंत्री हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद से जांच की कोई खबर नहीं है।
  2. सुवेन्दु अधिकारी – नारदा स्कैम के आरोपी। भाजपा में हैं, जांच की खबर नहीं।
    (बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना चाह रही पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट जाने को कहा है। राज्य सरकार का कहना था कि हाई कोर्ट की एक बेंच ने सुभेंदु पर कोई भी एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा रखी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामला सुनने से मना करते हुए कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में संशोधन का अनुरोध वहीं रखिए.) 15 दिसंबर 2022
  3. हिमन्त बिस्व सरमा – असम के मुख्यमंत्री। भाजपा में शामिल होने के बाद जांच रुकी हुई है। उनकी पत्नी पर पीपीई किट महंगा बेचने का आरोप भी है लेकिन सरमा कहते हैं कि यह किट मुफ्त दी गई थी और उस समय उपलब्धता नहीं होने के कारण प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।
  4. भावना गवली – सांसद शिव (शिन्दे) सेना। ईडी के पांच समन के बावजूद लोक सभा में सेना के चीफ व्हिप।
  5. यशवंत जाधव विधायक और यामिनी जाधव – फेमा उल्लंघन के लिए ईडी जांच हो रही थी। अब शिन्दे सेना के साथ हैं। केस की कोई खबर?
  6. प्रताप सरनायक – शिव सेना में थे तो मनी लांडरिंग का मामला था। अब शिन्दे सेना में हैं – मामले का पता नहीं।
  7. बीएस येदुरप्पा – घूसखोरी के मामले में अभियुक्त। पर कार्रवाई की अनुमति नहीं है इसके बिना कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है।

मंत्री ही नहीं सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए अनुमति चाहिए होती है। येदुरप्पा के मामले में नहीं है और संजीव भट्ट के मामले में 20 साल पुराने मामले में दे दी गई थी। आम आदमी पार्टी की सरकार के मंत्रियों के खिलाफ अनुमति देने में यह भी नहीं देखा जा रहा है कि सब जेल में होंगे तो सरकार कैसे चलेगी और मीडिया यह चिन्ता बड़ी गंभीरता से जता रहा है लेकिन यह नहीं बता रहा है कि बाकी मामलों में क्या हो रहा है। दूसरी ओर सरकार गोदी मीडिया की कमाई के घोषित-अघोषित हर उपाय करती है।

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