कानपुर की रेडीमेड कपड़ा मार्केट में तीसरे दिन भी धधक रहीं दुकानें
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कानपुर :- कपड़ा मर्केट में तीन दिन से धधक रही आग ने कई हजार करोड़ के रेडीमेड गारमेंट का कारोबार चौपट कर दिया। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें आग पर काबू पाने का लगातार प्रयास कर रही हैं। तीसरे दिन भी गोदाम व दुकानों में आग लगी है। जहां कपड़े भरे हैं और आग नहीं पहुंची वहां पानी भरने से माल बर्बाद हो गया है।लेकिन इसने एक खास कारोबार को इतना तगड़ा झटका दिया है कि इससे उबरने में महीनों लग जाएंगे। कई हजार करोड़ रुपये का माल आग में खाक हो चुका है तो जिन दुकानों में आग नहीं पहुंची वहां आग बुझाने के लिए लगातार डाले जा रहे पानी से माल खराब हो चुका है। यहां जो माल भरा है वह सिर्फ शहर के बाजारों में ही नहीं जाता।यहां से कानपुर के आसपास के जिले पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के कुछ जिलों तक माल जाता है। फिलहाल यह झटका कई माह के लिए है और दूसरे जिले, राज्य के साथ फुटकर व्यापारियों के पास माल की कमी हो जाएगी। कोपरगंज में दुकानों में लगी आग ने सिर्फ हमराज कांप्लेक्स बाजार का कारोबार प्रभावित नहीं किया है। यह बड़ा थोक बाजार है और करीब आठ सौ दुकानों से रोज ही करोड़ों का माल बिकता है।टैक्स इनवाइस और कच्चे पर्चों की बात बात करें तो रोज ही यहां की बिक्री 50 करोड़ रुपये से कम की नहीं होती है। कारोबारियों के मुताबिक यहां तीन स्तर पर माल रहता है। एक माल वह होता है जो दुकान में होता है और बिकता है। दूसरा गोदाम में है। तीसरा माल ट्रांसपोर्ट में रहता है। यह एक चक्र के मुताबिक चलता रहता है। जहां यह चक्र टूटा और कारोबार को तगड़ा झटका लगता है।यहां दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता, मुंबई, इंदौर और जयपुर से माल आता है। कई सीएंडएफ हैं जिनके पास कंपनियों का माल आता रहता है। इन सीएंडएफ के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनका अपने गोदाम में जो माल है, वह तो जल ही गया है, इसके अलावा वे यहीं बाजार में दुकानदारों को करोड़ों का माल दिए बैठे हैं। वह भी खाक हो चुका है। त्योहार के चलते बाजार में सामान्य स्थितियों से कई गुणा ज्यादा माल भरा हुआ था।होजरी उद्यमी बलराम नरुला ने शुक्रवार को ही दावा किया था कि दो हजार करोड़ रुपये का माल जल चुका है। शनिवार को जो बाकी बचा हुआ माल था, उसमें भी ज्यादातर जल गया। कारोबारियों के मुताबिक अब सबसे ज्यादा नुकसान सहालग के दौरान होगा। कंपनियां सीएंडएफ और थोक विक्रेताओं के हिसाब से डिजाइन तैयार कराती हैं। अब यहां से कई माह माल नहीं जा पाएगा। इसके साथ ही यह भी समस्या रहेगी कि जो कारोबारी इस दौरान दूसरी जगहों से माल लेने लगेंगे, वे फिर बाजार नहीं लौटेंगे।
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