कैसर खां अड्डा पर एसडीएम ने कराया जितेंद्र रस्तोगी का कब्जा
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– लेखपाल की गलती, चालीस साल बाद मिला कब्जा
– एसडीएम व पुलिस प्रशासन ने खड़े होकर लगवाए खंभे, खिंचवाए तार
– टीपू बोले अल्पसंख्यक हूं इसलिए प्रशासन नहीं देख रहा मेरे कागज
कायमगंज / फर्रूखाबाद :- (vnewslive24)
कई वर्षों तक न्यायालय में चले मुकदमे में आदेश पारित होने के बाद उप जिला अधिकारी यदुवंश कुमार वर्मा ने पुलिस फोर्स के साथ पहुंचकर जमीन को कब्जा मुक्त कराकर उसके मालिक को मालिकाना हक सौंपा। वही दूसरा पक्ष अल्पसंख्यक समुदाय होने का आरोप लगाकर प्रशासन पर लगाया तानाशाही करने का आरोप।
नगर के मोहल्ला बगिया निवासी सतीश चंद्र रस्तोगी पुत्र महावीर प्रसाद रस्तोगी की गाटा संख्या 105 पर 4 डेसिमल जगह केसर का अड्डा पर थी जिस पर सन 1984 में एक बाद माननीय न्यायालय में दायर किया गया था जिसमे सतीश चंद्र अग्रवाल द्वारा ग्राम सभा याहियापुर अप स्टेट एवं कैसर अली का पुत्र मोहसिन अली खान को प्रतिवादी बताते हुए कहा गया था की दिनांक 16.1.1984 को इंतखाब में लेखपाल से गलत दर्ज कर दिया गया है। वही अभी तक इस भूमि पर कैसर खां का कब्जा चला आ रहा था।

शनिवार जिला अधिकारी यदुवंश कुमार वर्मा ने पहुंचकर सतीश चंद्र रस्तोगी के पुत्र जितेंद्र रस्तोगी को उनका कब्जा दिलाया गया। जितेंद्र रस्तोगी द्वारा दिखाए गए आदेश में 24 /12 /1993 में एक आदेश माननीय न्यायालय द्वारा पारित किया गया था जिसमें कैसर खां पुत्र मोहसिन अली खान निवासी सुभानपुर का नाम निरस्त करते हुए सतीश चंद्र अग्रवाल रस्तोगी पुत्र महावीर प्रसाद का नाम बरकरार रखे जाने का आदेश दिया गया था।

लेकिन इस भूमि पर केसर का कब्जा लगातार बना हुआ था एसडीम कायमगंज ने पहुंचकर भूमि का चिन्ह्यांकन करकर जितेंद्र रस्तोगी को कब्जा दिलाया। केसर खां के पुत्र टीपू ने 1995 का एक समझौता पत्र दिखाते हुए कहा की बुजुर्गों का किसी भूमि को लेकर समझौता हो गया था अब यह घूम हमारे है समझौते के आधार पर कॉर्नर की भूमि पर बने शिव मंदिर की देखरेख सतीश चंद्र रस्तोगी के परिवारीजनों के सुपुर्द है। उस पर उन्ही का अधिकार रहेगा। भूमि हमारे नाम दाखिल खारिज नहीं हो सकी थी और हम अल्पसंख्यक समुदाय के हैं इसलिए प्रशासन द्वारा हमारा शोषण किया जा रहा है हम इसके विरुद्ध न्यायालय में जाएंगे।
क्या बोले एसडीम कायमगंज
उप जिलाधिकारी यदुवंश कुमार वर्मा ने कहा की खतौनी में सतीश चंद्र का नाम अंकित है जिसके नाम भूमि है वही मालिक है यह जो समझौता दिखा रहे हैं यह इन्होंने न्यायालय के बाहर किया हुआ है जिसको माननीय न्यायालय द्वारा मंजूर नहीं किया गया है इस आधार पर जब तक भूमि पर सतीश चंद्र का नाम अंकित है वही उसका असली हकदार है।
पीडब्ल्यूडी की जद में आएगी यह भूमि
यदि मौके की नजाकत देखें तो इस व्यस्तम मार्ग पर बीच सड़क से 45 फुट की दूरी तक दोनों तरफ कोई भी पक्का निर्माण नहीं कराया जा सकता है क्योंकि यह पीडब्ल्यूडी की जद में आती है खैर जो भी हो वह अधिकारियों के जांच का विषय है।
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