आम के पेड़ बौर से लदे , आम की अच्छी फसल के संकेत
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कायमगंज / फर्रुखाबाद :- आम की फसल ने इस बार किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी है। आम के पेड़ बौर से लदे हुए हैं। बौर की अधिकता से आम की अच्छी फसल के संकेत माने जा रहे हैं। वहीं फसलों के जानकारों का कहना है कि फसल पर कीटों व रोगों का खतरा भी मंडराने लगा है। उनका कहना है कि कीटनाशकों का उपयोग करें, नहीं तो कीट फसल चट कर जाएंगे।
फरवरी से ही आम के पेड़ बौर से पूरी तरह ढक गए। उम्मीद है कि मार्च के अंत तक लोगों को बाजार में देशी कच्चे आम मिलना शुरू हो जाएंगे। मौसम के उतार चढ़ाव के कारण इस बार आम के वृक्ष में बौर समय से पहले ही आना शुरू हो गया है। जिले में आम की फसल कई हेक्टेयर में है। ऐसे में आम की अच्छी पैदावार की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि इस बीच बौर पर कीटों के खतरे का भी अंदेशा जताया जा रहा है। बौर में फंगल व झुलसा रोग की भी आशंका है। वहीं फसलों के जानकार संजीव गंगवार, मंगल गंगवार आदि बागवानों का कहना है कि अच्छी पैदावार के लिए उचित प्रबंधन, सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव चरणबद्ध तरीके से करना जरूरी है। तभी आम की पैदावार अच्छी हो सकेगी और किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा।
आम के बौर में झुलसा रोग से फूलों और अविकसित फलों के गिरने की आशंका बनी रहती है। बौर को बचाने के लिए मेन्कोजेब – कार्बेन्डाजिम के .2 प्रतिशत घोल 20 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर 10 से 12 दिनों तक छिड़काव करना चाहिए। समय से उपचार न किए जाने पर फसल को नुकसान हो सकता है।
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