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सरकारी स्कूल में स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ रहे बच्चे, वीडियो और 3D टेक्नॉलजी से पढ़ाई हुई मजेदार – सरकारी स्कूल पढ़ाई डिजिटल बोर्ड

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कायमगंज / फर्रूखाबाद :- अब सरकारी स्कूलों में परिवर्तन होने लगा है। स्कूलों में अब डिजिटल बोर्ड पर वीडियो और 3D एनिमेशन के जरिए पढ़ाना शुरू हो गया है। शुक्रवार को जब टीम तहसील के सामने बने परिषदीय विद्यालय में पहुंची तो वहां शिक्षामित्र मोहसिन से बच्चों से पढ़ाई के अनुभवों के बारे में जानकारी ली।

समय के साथ कायमगंज नगर के सरकारी स्कूल भी डिजिटल हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का तरीका भी बदल रहा है। अब कक्षा में डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे बच्चों को किसी भी विषय को समझाना बहुत आसान हो गया है। कायमगंज नगर के एक सरकारी स्कूल में भी डिजिटल बोर्ड के जरिए बच्चों को पढ़ाया जा रहा है, जिससे अब स्कूल की कक्षाओं में ब्लैक बोर्ड की जगह डिजिटल बोर्ड पर एनिमेटेड ग्राफिक्स के जरिए पढ़ाई कराना शुरू हो गया है।
ये सरकारी स्कूल कायमगंज तहसील के ठीक सामने है। अब इस स्कूल में बच्चों खेल-खेल में ग्राफिक्स, वीडियो देख कर अपने पाठ्यक्रम को आसानी से समझते हैं, जिससे शिक्षामित्र मोहसिन को भी पढ़ाने में काफी मजा आता है, वहीं बच्चें भी पढ़ाए गए पाठ को जल्दी नहीं भूलते हैं। डिजिटल बोर्ड की वजह से बच्चों की पढ़ाई मजेदार हो गई है। वहीं उनका अब स्कूल आने में भी मन लगता है।

मोहसिन इस स्कूल में एक मात्र शिक्षामित्र हैं। जिन पर प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों विद्यालयों के 155 बच्चों की जिम्मेदारी है।उनका कहना है कि पहले बच्चे इंग्लिश में तो बिल्कुल भी रुची नहीं लेते थे। कई टॉपिक्स तो बच्चों को समझ में ही नहीं आते थे, लेकिन अब डिजिटल बोर्ड के आने से वो बच्चों को पहले उस स्टोरी की एनिमेटेड वीडियो दिखाती हैं, उसके बाद वो विस्तार से पूरे पाठ को समझाती है। बच्चे वीडियो को देखने के बाद सबकुछ समझ जाते हैं, और जल्दी याद भी कर लेते हैं। फिलहाल स्कूल में वाई फाई की व्यवस्था नहीं है। तो मोबाइल से काम चला लेते हैं।
मोहसिन शिक्षामित्र का कहना है कि बच्चे इस डिजिटल बोर्ड से अब मुश्किल लगने वाले विषयों को भी इंटरेस्ट लेकर पढ़ते हैं। बच्चें साइंस और गणित विषय सुन कर ही घबरा जाते थे, लेकिन अब 3D डायग्राम के जरिए बच्चों आसानी से सब समझ जाते हैं। बच्चों को गणित के मश्किल सवालों के फार्मुला ट्रिक्स भी याद हो जाते हैं। यदि विद्यालय को एक एक्सपर्ट शिक्षक मिल जाए तो हम निजी स्कूलों को मात दे देंगे। स्कूल में डिजिटल बोर्ड लग जाने के बाद स्कूल में पढ़ाई करने में बच्चे रुची दिखा रहे हैं। पहले की तुलना में अब स्कूल में बच्चों की संख्या भी बढ़ गई है। वहीं बच्चों के लिए कंप्यूटर क्लास की भी व्यवस्था हो गई है। समर कैंप में बच्चों को कंप्यूटर क्लास दी गई थी।
वहीं डिजिटल एजुकेशन से बच्चे भी काफी खुश नजर आए। बच्चों का कहना है कि स्मार्ट बोर्ड और ब्लैक बोर्ड में बहुत फर्क है। अगर कोई टॉपिक समझ नहीं आता तो टीचर स्मार्ट बोर्ड पर उस टॉपिक से जुड़े डायग्राम, तस्वीरें, वीडियो, कार्टून और स्टोरी दिखाते हैं, जिसके बाद उन्हें वो टॉपिक पूरी तरह से समझ में आ जाता है, जो कि काफी मजेदार है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट सुना चुका है ऐसा ही एक फैसला

वर्ष 2015 में यूपी की बदहाल प्राथमिक शिक्षा पर कड़ी चोट करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश दिया था। अदालत ने साफ कहा था कि मंत्रियों, नेताओं, आईएएस व पीसीएस अफसरों, जजों, सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को सरकारी प्राथमिक स्कूलों में ही पढ़ाया जाए। निगम, अर्द्धसरकारी संस्थानों या जो कोई भी राज्य के खजाने से वेतन ले रहा है, उनके बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढ़ाना अनिवार्य किया जाए। हालांकि ये व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।

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