कायमगंज कोतवाली में इंसाफ या यातना, पुलिस पर थर्ड डिग्री टार्चर का गम्भीर आरोप
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– पुलिस उत्पीड़न से परेशान मोहल्लेवासियों ने की SDM से शिकायत
– हत्या की जांच में पूछताछ के नाम पर पुलिस पर थर्ड डिग्री प्रताड़ना का आरोप
फर्रूखाबाद :- नगर के मोहल्ला कूंचा गंगा दरवाजा के निवासियों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने उप जिलाधिकारी को संबोधित एक सामूहिक शिकायतीपत्र नायब तहसीलदार अनवर हुसैन को सौंपा है। मोहल्लेवासियों का आरोप है कि वृद्ध पति पत्नी दोहरे हत्याकांड के मामले में पूछताछ के नाम पर पुलिस उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रही है।

शिकायत पत्र में मोहल्ले वासियों ने बताया है कि पुलिस उन्हें बार-बार कोतवाली बुलाती है। वहां उन्हें घंटों बैठाया जाता है, उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती है और जुर्म कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से पूरे मोहल्ले में डर का माहौल व्याप्त है। इतना भय है कि हम लोगों का खाना – खाना भी हराम हो रहा है।

आपको बता दें कि यह मामला 26 फरवरी 2026 को मोहल्ला कूंचा गंगा दरवाजा में वृद्ध पुरुषोत्तम व उनकी पत्नी पुष्पा देवी की अज्ञात बदमाशों द्वारा हत्या कर दी गई थी। घटना के लगभग 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी तक इस मामले का खुलासा नहीं कर पाई है। इस घटना के संबंध में डीआईजी हरीश चंदर भी घटनास्थल का दौरा कर चुके हैं।
मोहल्ले वासियों ने स्पष्ट किया है कि वे जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन निर्दोष लोगों को प्रताड़ित करना और जबरन जुर्म कबूल करवाना और पटे से बेरहमी से पीटना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित कोतवाली प्रभारी को निर्देशित किया जाए ताकि निर्दोष लोगों को परेशान करना और बेरहमी से मारपीट जैसी घटनाओं पर रोक लगे। प्रार्थना पत्र पर अजय कौशल, किशन कौशल, सचिन, काजल, सरिता, माया देवी, पिंकी सहित दर्जनों लोगों के हस्ताक्षर हैं।
इस संबंध में क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार द्विवेदी ने जानकारी दी है कि पुलिस केवल कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने बुलाती है और पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया जाता है। उन्होंने मोहल्ले वासियों द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोपों को निराधार बताया है।
क्या बोले पीड़ित
– पीड़ित किशन कौशल ने बताया कि वह सर्दियों में गजक पट्टी का काम करते हैं वर्तमान में गोल गप्पे बेचते हैं। कोतवाली पुलिस ने उन्हें बुलाया वह तुरंत वहां ठेला छोड़कर पहुंचे। जहां पहले दिन मेरे गालों पर तमाचे मारे और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। दोबारा बुलाया गया तो डर के बाद भी गया। https://youtu.be/tYdu8rYha-E?si=UDluVq56xqqnj_YD
जहां मुझे पटे से मारा उसके बाद मैने आज तक फिल्मों में देखा था वैसा मेरे साथ व्यवहार किया गया। मेरे पैर के तलवों पर बुरी तरह लाठियां मारी गई।
– संतोष कोरी ने बताया कि मुझे पुलिस ले गई जहां मुझे पटे से पीटा गया।
– नीतीश कौशल उर्फ देव ने बताया कि वह श्यामगेट पर पानी बताशा बेच रहे थे पुलिस बुलाकर ले गई और मेरे साथ मारपीट की गई। https://youtu.be/AY0Xat7bJ-8?si=vd5Mz0L7B2qCKX45
– लल्लूराम की मां ने कहा कि उसका बेटा वीपी का मरीज है पानी बताशा बेच कर गुजारा करते हैं वह भी पुलिस के नाम से काफी डरा हुआ है। हम पूछताछ में हर तरह का सहयोग देने को तैयार हैं लेकिन इतनी बेरहमी से मारपीट ना की जाए।
मानवाधिकार हनन में सबसे ऊपर यूपी पुलिस, 56 फीसदी शिकायतें खिलाफ
यूपी राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सबसे अधिक मानवाधिकारों का हनन पुलिस ही कर रही है। कुल शिकायतों में करीब 56 प्रतिशत अकेले उसके खिलाफ हैं। यह पुलिस द्वारा मानवाधिकारों को नहीं मानने की तरफ इशारा है।आयोग के आंकड़ों को देखें तो मानवाधिकार उल्लंघन के कुल 22,655 शिकायतें एक अप्रैल-2017 से लेकर 30 नवंबर-2017 तक आई हैं। इनमें पुलिस महकमा सबसे ऊपर है। कुल 12,771 शिकायतें उसके खिलाफ आई हैं।
इनमें एनकाउंटर के नाम पर हत्या, पुलिस कस्टडी में मौत, बिना एफआईआर थाने में बैठाने, पूछताछ के नाम पर हिरासत में लेने, जांच के नाम पर उत्पीड़न शामिल है। दूसरे नंबर पर शिकायतों में जमीन और रेवेन्यू रिकॉर्ड से जुड़े मामले हैं।
वहीं, महिला उत्पीड़न के मामले तीसरे नंबर पर हैं। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि बेहतर पर्यावरण मिलना भी लोगों का मानवाधिकार है। यही वजह है कि एक अप्रैल-2017 से अब तक 23 मामलों में आयोग ने सुनवाई की है। इनमें से पांच मामले निस्तारित भी किए जा चुके हैं।
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