नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे 9616953133 / 8318645910,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , ‘12 मन सूखी लकड़ी ही मेरी प्रॉपर्टी है, इसी में जलाना’, नाना पाटेकर की मौत पर चर्चा में आया जिंदगी का फलसफा – V News Live24

V News Live24

Latest Online Breaking News

‘12 मन सूखी लकड़ी ही मेरी प्रॉपर्टी है, इसी में जलाना’, नाना पाटेकर की मौत पर चर्चा में आया जिंदगी का फलसफा

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

नई दिल्ली (Desk) :-  हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में दिल का दौरा पड़ने से उनके निधन की खबर सामने आई। उनके निधन से फिल्म जगत और प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज, दमदार अभिनय और स्पष्ट विचारों के लिए पहचाने जाते थे। उनके जीवन और मृत्यु को लेकर दिए गए पुराने बयान एक बार फिर चर्चा में हैं।

साल 2023 में फिल्म द वैक्सीन वॉर की रिलीज के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने जिंदगी, मौत और दुनियावी मोह-माया को लेकर अपने विचार साझा किए थे। उनके शब्दों में मृत्यु को लेकर एक सहज स्वीकार्यता और जीवन की वास्तविकता का गहरा संदेश दिखाई देता है।

‘मुझे मृत्यु पर विश्वास है’

नाना पाटेकर ने इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें मालूम है कि एक दिन उन्हें इस दुनिया से जाना है। उन्होंने कहा था, “मुझे मालूम है कि कल मरने वाला हूं मैं, मुझे मृत्यु पर विश्वास है। इसी वजह से मुझे इन बातों में कोई दिलचस्पी नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा था कि जो लोग यह सोचते हैं कि वे कभी नहीं मरेंगे, वे जिंदगीभर चीजें इकट्ठा करने में लगे रहते हैं। उनके इस बयान में जीवन की नश्वरता और जरूरत से ज्यादा संग्रह करने की प्रवृत्ति पर सवाल नजर आता है।

‘12 मन लकड़ी ही मेरी पूरी प्रॉपर्टी है’

इंटरव्यू के दौरान नाना पाटेकर से पूछा गया था कि फिल्म इंडस्ट्री में कई लोग शोहरत और ग्लैमर के बीच बदल जाते हैं, लेकिन उनके व्यक्तित्व में बनावट क्यों नहीं आई।

इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने अपने बेबाक अंदाज में कहा था, “मुझे मालूम है कि जाना है और 12 मन लकड़ी लगने वाली है। यही मेरी पूरी प्रॉपर्टी है। इसी के साथ चला जाऊंगा।”

उनके इस कथन का आशय था कि इंसान दुनिया में कितना भी नाम, पैसा और संपत्ति कमा ले, लेकिन मृत्यु के बाद उसके साथ कुछ भी नहीं जाता।

‘मुझे गीली लकड़ी में मत जलाना’

नाना पाटेकर ने अपने अंतिम संस्कार को लेकर भी एक ऐसा विचार साझा किया था, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा था कि उन्होंने सूखी लकड़ियां रखने की बात कही है और उनके अंतिम संस्कार में उन्हीं का इस्तेमाल किया जाए।

उन्होंने अपने खास अंदाज में कहा था कि गीली लकड़ी से धुआं उठेगा और आसपास खड़े लोगों की आंखों में पानी आ जाएगा। फिर उन्हें यह गलतफहमी हो सकती है कि लोग उनके लिए रो रहे हैं।

उनके इस कथन में मृत्यु को लेकर गंभीर विचार के साथ-साथ उनका विशिष्ट व्यंग्यात्मक अंदाज भी झलकता है। वह जीवन के अंतिम क्षणों तक किसी भ्रम में नहीं रहना चाहते थे।

‘मेरे मरने के बाद मेरी तस्वीर भी मत लगाना’

नाना पाटेकर ने एक पुराने इंटरव्यू में यह भी कहा था कि उनके जाने के बाद उनकी तस्वीर लगाने के बजाय उन्हें पूरी तरह भुला दिया जाए।

उन्होंने कहा था, “आप मर जाओगे, आपको कोई याद नहीं करेगा। दो-चार दिन के बाद सब भूल जाएंगे। हमने तो यह भी बोल दिया है कि मेरी तस्वीर भी तुम मत लगाओ। पूरी तरह भूल जाओ।”

उनके इस बयान को उनकी सादगी और प्रसिद्धि के प्रति उनके नजरिए से जोड़कर देखा जाता है। वह मानते थे कि जीवन को दिखावे और दूसरों की यादों में बने रहने की इच्छा से परे जाकर भी जिया जा सकता है।

‘मृत्यु के बाद मां से मिलने जाऊंगा’

नाना पाटेकर के जीवन का भावुक पहलू उनकी मां और परिवार से जुड़ी यादों में दिखाई देता था। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें आज भी लगता है कि उनकी मां जीवित हैं और मृत्यु के बाद वह उनसे मिलने जाएंगे।

उन्होंने बताया था कि वे सात भाई-बहन थे, जिनमें से छह का निधन हो चुका था। उन्होंने कहा था कि जब मां, पिता, भाई और बहन इस दुनिया में नहीं रहे, तो उन्हें लगता है कि उनका अपना संसार भी कहीं पीछे छूट गया है।

उनकी इन बातों से परिवार के प्रति उनका लगाव और अपनों को खोने का दर्द झलकता है।

‘प्रहार’ से निर्देशन की दुनिया में रखा कदम

नाना पाटेकर ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1991 में रिलीज हुई फिल्म प्रहार: द फाइनल अटैक में उन्होंने अभिनय करने के साथ निर्देशन और लेखन की जिम्मेदारी भी निभाई।

फिल्म में उन्होंने मेजर प्रताप चौहान का किरदार निभाया था। यह किरदार एक प्रशिक्षित सैन्य अधिकारी का था, जो देश की सेवा करने के बाद समाज में फैले भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है।

इससे पहले फिल्म परिंदा में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली थी। इस फिल्म में उन्होंने अन्ना सेठ नाम के गैंगस्टर की भूमिका निभाई थी।

‘वजूद’ में आशिक, ‘क्रांतिवीर’ में प्रताप बनकर जीता दिल

नाना पाटेकर ने अपने करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। वर्ष 1998 में आई फिल्म वजूद में उनका अलग अंदाज देखने को मिला। फिल्म में माधुरी दीक्षित के साथ उनकी भूमिका और संवाद दर्शकों को याद रहे।

वहीं, वर्ष 1994 की फिल्म क्रांतिवीर में प्रताप नारायण तिलक के किरदार ने उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई। इस फिल्म में उनके दमदार संवाद और अभिनय को आज भी याद किया जाता है।

नाना पाटेकर की यादगार फिल्में

नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। उनकी प्रमुख फिल्मों में शामिल हैं—

  • परिंदा (1989): अन्ना सेठ के रूप में प्रभावशाली अभिनय।
  • प्रहार: द फाइनल अटैक (1991): मेजर प्रताप चौहान की भूमिका और निर्देशन।
  • तिरंगा (1993): इंस्पेक्टर शिवाजीराव वाघले के किरदार से लोकप्रियता।
  • क्रांतिवीर (1994): प्रताप नारायण तिलक की दमदार भूमिका।
  • अपहरण (2005): सत्ता और अपराध की दुनिया से जुड़ा यादगार किरदार।
  • अब तक छप्पन (2004): एनकाउंटर स्पेशलिस्ट साधु आगाशे के रूप में शानदार अभिनय।
  • वेलकम (2007): उदय शेट्टी के हास्यपूर्ण और प्रभावशाली किरदार से दर्शकों का मनोरंजन।
  • राजनीति (2010): राजनीतिक संघर्ष पर आधारित फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका।

नाना पाटेकर का अभिनय उनकी संवाद अदायगी, चेहरे के भावों और किरदारों में गहराई के लिए जाना जाता रहा। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य अभिनय तक, उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

जिंदगी की सच्चाई को अपने अंदाज में बयां करते थे नाना

नाना पाटेकर के पुराने बयानों में जीवन की अस्थिरता, मृत्यु की सच्चाई और दुनियावी मोह-माया से दूरी का विचार बार-बार सामने आता है। वह अपने बेबाक अंदाज में ऐसी बातें कहते थे, जो सुनने में सहज लगती थीं, लेकिन उनके पीछे गहरा भाव छिपा होता था।

उनके अभिनय से सिनेमा प्रेमियों को कई यादगार किरदार मिले। वहीं, जिंदगी और मौत को लेकर उनके विचार भी लोगों को लंबे समय तक सोचने पर मजबूर करते रहेंगे।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now

[responsivevoice_button voice="Hindi Male"]