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बांकेबिहारी मंदिर एक दिन पहले मनेगी होली

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वृंदावन-मथुरा:-  ब्रज के पौराणिक मंदिरों के प्रतिनिधि संगठन ब्रज तीर्थ देवालय न्यास ने शनिवार को बैठक आयोजित कर दो दिन होली मनाए जाने के भ्रम को दूर करने के लिए शास्त्रीय प्रमाणों पर चर्चा की। सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि होलिका दहन 7 मार्च की भोर में तथा धुलेंडी 8 मार्च को ही मनाई जाएगी। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में होलिका दहन 6 मार्च की रात और धुलेंडी 7 मार्च को मनाई जाएगी।राधाकांत मंदिर में शनिवार को ब्रज तीर्थ देवालय न्यास की बैठक की अध्यक्षता करते हुए याज्ञिक आचार्य पंडित विष्णुकांत शास्त्री ने कहा, सिंधु व जयसिंह कल्पद्रुम ग्रंथों में स्पष्ट है कि होलिका दहन प्रदोष काल में सर्वश्रेष्ठ है।, जो इस बार 6 मार्च की रात्रि लगभग 12.20 से 1.30 बजे तक है। इसमें होलिका दहन किया जा सकता है। सर्वश्रेष्ठ रूप से सुबह 5.13 बजे ही होलिका दहन उत्तम और शास्त्रोचित है।न्यास अध्यक्ष आचार्य रमाकांत गोस्वामी, महामंत्री ब्रजराज दाऊजी मंदिर के रिसीवर आरके पांडे, नंदगांव सेवायत गोस्वामी, हरिमोहन गोस्वामी, बरसाना लाड़ली मंदिर के सेवायत प्रवीण गोस्वामी, आचार्य मृदुल कांत शास्त्री, आचार्य राजू भैया, अमर बिहारी पाठक, गोवर्धन से पूर्णप्रकाश कौशिक, गोकुल से राजीव शर्मा, विनय त्रिपाठी, गोपीश्वर मंदिर सेवायत सोनू गोस्वामी ने कहा कि धुलेंडी यानि रंगों की होली प्रतिपदा में खेली जानी चाहिए। आठ को प्रतिपदा है।नंदगांव के सेवायत श्यामसुंदर गोस्वामी, राधा वल्लभ मंदिर सेवायत मुकुट वल्लभ गोस्वामी, राधारमण मंदिर के सेवायत सुमित गोस्वामी, केशीघाट सेवायत सिद्धार्थ शुक्ला, नृसिंह मंदिर के सेवायत विष्णु सिद्ध, बटुक भैरव मंदिर के सेवायत द्वारिका प्रसाद गौड़, गरुण गोविंद मंदिर के सेवायत महावीर गौतम, यश गौतम मौजूद रहे।ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में 6 मार्च की रात 12.18 से 1.30 बजे तक होलिका दहन होगा। जबकि धुलेंडी 8 मार्च की सुबह ही मनाई जाएगी। मंदिर सेवायतों के अनुसार मंदिर में काशी के पंचांग के अनुसार ही उत्सव मनाया जाएगा।

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