सरकारी स्कूलो में नही हो रहे पंजीकरण , प्राइवेट स्कूलों में दाखिला कराने को मजबूर
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– नौकरी चाहिए सरकारी ,बच्चे प्राइवेट में स्कूल में पढ़ाएंगे नेता व अधिकारी
कायमगंज / फर्रूखाबाद :- भारतीय जनता पार्टी विकसित भारत का सपना संजो रही हैं लेकिन वर्तमान में नगर के सरकारी स्कूलों की गिर रही स्थिति को भांपते हुए यदि कहा जाए कि आने वाले समय में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारो के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हो सकते हैं तो यह कोई बढ़ी बात नहीं होगी। नए शिक्षा सत्र में शिक्षको की लाख कोशिशों के बाद सरकारी स्कूलों मे नवीन बच्चों के पंजीकरण नहीं हो रहे हैं। जबकि सरकार का दावा है कि सरकारी स्कूलो की बिल्डिंग प्राइवेट स्कूलों से अच्छी करा दी गई हैं। बच्चों के खेलने का सामान भी उपलब्ध हैं। बिजली के पंखे भी लगे हैं। फिर ऐसी क्या समस्या आ रही हैं कि जहां सरकारी स्कूलो में निःशुल्क कोर्स,डेªस,मिड डे मील जैसी सुविधाए मिलने के बाद भी नगर वासी सरकारी स्कूलो पर भरोसा नहीं कर रहे हैं।
क्या कहते हैं नगरवासी :-
जब इस सम्बन्ध में मोहल्ला नई बस्ती निवासी वाजिद अली उर्फ राका मंसूरी से बात की तो उनका कहना था
कि नगर के सरकारी स्कूलों में जब शिक्षक ही नहीं है तो बच्चों का पंजीकरण कराने से क्या फायदा। कई बार मीडिया व नगर की विभिन्न संस्थाओं ने ज्ञापन दे कर यहां शिक्षको की मांग की है लेकिन शासन और प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं देता। नगर के 13 विद्यालयों में मात्र दो शिक्षक व चार शिक्षा मित्र हैं। यह कैसे बच्चों को पढ़ा पाएंगे। मजबूरन गरीब कर्ज लेकर बच्चांे को प्राइवेट स्कूल में दाखिला करा रहे हैं।
भाजपा अल्लसंख्यक मोर्चा के पदाधिकारी व मंसरी सोसाइयटी मेडिकल सोशल वर्कर्स के
अध्यक्ष डा0 अरशद मंसरी ने शिक्षा विभाग की कुम्भकरणीय नींद को जगाने के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजकर एक घंटा प्रतिदिन जूनियर हाई स्कूल चिलांका में निःशुल्क शिक्षण कार्य हेतु अनुमति मांगी। जिससे नौनिहालों को भविष्य खराब न हो।
अधिवक्ता सुधीर शाक्य का कहना है कि सरकार की मंशा ही नहीं है कि गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के बच्चे पढ़ सके।
वह तो झूठा सपना दिखा कर जनता को मूर्ख बना रही है। जब पढ़ेगा नहीं इंडिया तो कैसे बढ़ेगा इंडिया। सरकारी स्कूलो में ट्रेंड शिक्षक होते हैं। लेकिन कई सालों से नगर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद नई नियुक्तियां नहीं हुईं। जिससे लोगों के सामने अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना मजबूरी है। यदि सरकार को इन स्कूलों की दशा सुधारनी है तो शिक्षा का एकीकरण के साथ-साथ नेताओं व आला अधिकारियो के बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में कराना चाहिए। क्योंकि नौकरी सरकारी चाहिए पर अपने बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढाएंगे। नगर में कई संस्थाएं हैं जो समाज सेवा का व्याख्यान करती हैं उन्हें चाहिए कि जब तक इन स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होती तब तक वह स्कूल को गोद लेकर युवाओं को मानदेय देकर स्कूलों में लगा दें जिससे पूर्व की तरह गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चें पढ़ सकते हैं। नेताओं और अधिकारीयों की तरह गोद लेने का दिखावा न करें। एक शिक्षित युवा देश का भविष्य बदलने में सहायक हो सकता है।
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