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दिल्ली का ‘दंगल’ जीतने की तैयारी?

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Delhi Election :-  यह जानना अहम है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में कौन से मुद्दों का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इसके अलावा वे कौन से चेहरे होंगे, जिनके दम पर राजनीतिक दल दिल्ली के चुनाव को जीतने की तैयारी रहे हैं । आइये जानते हैं…
दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान हो गया। इस बार यह मुकाबला तीन बड़े दलों- सत्तासीन आम आदमी पार्टी, विपक्षी भाजपा और पिछले चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने वाली कांग्रेस के बीच हो रहा है। तीनों ही दल अपने पिछले प्रदर्शन से कहीं बेहतर सीटें लाने का दावा कर रहे हैं।

दिल्ली में बीते 12 वर्षों से आम आदमी पार्टी की सरकार है। इस सरकार ने 2013, 2015 और फिर 2020 के चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल की, लेकिन इस बार का चुनाव दिलचस्प होने की एक बड़ी वजह है आप पर लगे आरोप। दरअसल, पहले तीन चुनावों में आप ने दिल्ली का कार्यभार बेदाग छवि के साथ संभाला। हालांकि, इस बार पहले शराब घोटाला उसके बाद मुख्यमंत्री बंगले के रेनोवेशन से जुड़े आरोप सामने आने के चलते केजरीवाल एंड कंपनी की राह उतनी आसान नजर नहीं आ रही। इतना ही नहीं भाजपा और कांग्रेस ने भी अपनी उम्मीदवारों की लिस्ट में कद्दावर नेताओं का नाम देकर यह साबित कर दिया है कि वह इस चुनाव में किसी के लिए कोई मौका नहीं छोड़ना चाहतीं।
इस बीच यह जानना अहम है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में कौन से मुद्दों का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इसके अलावा वे कौन से चेहरे होंगे, जिनके दम पर राजनीतिक दल दिल्ली के चुनाव को जीतने की तैयारी रहे हैं ।

आइये जानते हैं… क्या होंगे इस चुनाव में मुद्दे?

1. मनी लॉन्ड्रिंग-शराब घोटाला केस

दिल्ली में विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी उसके ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, जिसके चलते बीते तीन से चार वर्षों में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सत्येंद्र जैन जैसे शीर्ष नेताओं को जेल तक जाना पड़ा है। इनमें सबसे बड़े आरोप रहे हैं मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाला केस से जुड़े आरोप, जिन्हें लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आप पर हमलावर रहे हैं।

2. यमुना की सफाई
दिल्ली विधानसभा चुनावों में दूसरा बड़ा मुद्दा यमुना नदी की सफाई से जुड़ा है। दरअसल, आप सरकार ने ही वादा किया था कि उसके सरकार में आने के बाद यमुना नदी को इतना साफ कर दिया जाएगा कि लोग उसमें डुबकी लगा सकेंगे। हालांकि, 12 वर्ष बाद भी इस पवित्र नदी में प्रदूषण पहले से बदतर स्थिति में है। बताया जाता है कि आप ने इसे लेकर बड़ी धनराशि भी खर्च की है। लेकिन उसकी इन कोशिशों का कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। इसके उलट दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना और दिल्ली हाईकोर्ट तक ने आप सरकार की खिंचाई की है और उससे जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए कहा है।
इस पर विपक्ष ने आप को घेरते हुए कहा कि दिल्ली सरकार को यमुना की सफाई के लिए हजारों करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है, लेकिन अरविंद केजरीवाल सरकार ने यह पैसा अपने झूठे प्रचार पर खर्च किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के भ्रष्ट शासन के कारण दिल्ली से पैदा होने वाले गन्दे जल को एसटीपी में साफ नहीं किया जा रहा है और इसकी कीमत यमुना और दिल्ली वालों को भुगतनी पड़ रही है।

3. शीशमहल मुद्दा
दिल्ली के विधानसभा चुनाव से पहले जो एक और मुद्दा आप के लिए सिरदर्द बनकर उभरा है, वह है अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास में रहने के दौरान इसके रेनोवेशन कराने का मुद्दा। हाल ही में सीएजी ऑडिटर रिपोर्ट के हवाले से एक अखबार ने दावा किया है कि शुरू में सीएम के आवास के रेनोवेशन की लागत 7.91 करोड़ रुपये बताई गई थी। लेकिन बाद में 2020 में करीब 8.62 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। लेकिन 2022 में जब इसे पूरा किया गया तो इसकी कुल लागत 33.66 करोड़ रुपये थी। पिछले एक साल से इस मुद्दे को उठा रही भाजपा को इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद आप पर वार करने का और मौका मिल गया। भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बंगले पर 75 से 80 करोड़ रुपये खर्च किए थे।
विपक्ष का कहना है कि 2020 में जब दिल्ली की जनता अपने लोगों को खो रही थी। उस समय अरविंद केजरीवाल अपना शीश महल बनवा रहे थे। किसी भी सरकारी विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई। इसके निर्माण में अनियमितताएं बरती गईं। पीडब्ल्यूडी विभाग ने 2024 में जो इन्वेंटरी घोषित की है और जो समान दिखाया है कि यह पीडब्ल्यूडी ने नहीं लगाया है, वह समान कहां से आया। वह किसका पैसा है? इसका जवाब अरविंद केजरीवाल को देना होगा।

4. वोटर लिस्ट में घोटाले के आरोप
दिल्ली में एक और मुद्दा, जिस पर बीते कई महीनों से राजनीति हो रही है, वह है वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और काटने को लेकर। इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी लगातार चुनाव आयोग से सवाल पूछ रही है और भाजपा पर नई दिल्ली सीट में बड़ा खेल करने का आरोप लगा रही है। इस मुद्दे पर दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी मर्लेना ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी है। आप का आरोप है कि नई दिल्ली में 10 फीसदी वोटर्स को जोड़ा गया है, जबकि पांच फीसदी वोट काटे गए हैं। यह एक षड्यंत्र चल रहा है।
इससे पहले केजरीवाल ने भी कुछ ऐसे ही आरोप लगाते हुए भाजपा को घेरा था और कहा था कि वह दिल्ली विधानसभा में वोट कटवाने के साथ फर्जी नाम जुड़वाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बाहर से लोगों को लाकर उनके फर्जी वोट बनवा रही है और आप समर्थकों का वोट कटवाने, फर्जी वोट बनवाने के साथ वोट के लिए पैसे दे रही है। आप के इन आरोपों को चुनाव आयोग ने खारिज किया है और वोटर लिस्ट के सत्यापन तक की बात कही है। हालांकि, आप ने चुनाव में इसे मुद्दा बना दिया है।

5. महिलाओं के लिए सम्मान राशि
देश में पिछले विधानसभा चुनाव- झारखंड और महाराष्ट्र में हुए थे। इन दोनों ही राज्यों में राजनीतिक दलों के चुनाव जीतने की एक बड़ी वजह महिलाओं पर केंद्रित आर्थिक मदद की योजनाओं को माना गया था। आम आदमी पार्टी ने इसी फॉर्मूले को अपनाते हुए हाल ही में एलान किया था कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए महिला सम्मान योजना लागू कर रही है और इसके तहत वह 18 साल से ऊपर की महिलाओं के खाते में 1000 रुपये की वित्तीय सहायता डालेगी। केजरीवाल ने वादा किया था कि चुनाव जीतने के बाद इस राशि को बढ़ाकर 2100 रुपये कर दिया जाएगा।
हालांकि, आप इस योजना को लेकर पहले ही विवाद हो चुका है। दरअसल, इस एलान के बाद दिल्ली के महिला एवं बाल विकास विभाग ने अखबार में विज्ञापन देकर कहा था कि एक राजनीतिक दल दिल्ली में महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत 2100 रुपये देने का दावा कर रहा है। यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली सरकार की तरफ से ऐसी किसी योजना का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। ऐसे में ऐसी गैर-मौजूद योजनाओं पर विश्वास न करें। आप ने दिल्ली के विभाग के इस नोटिस को भाजपा की साजिश करार दिया था।
उधर दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी इस योजना को लेकर आप को निशाने पर लिया है। वीके सक्सेना ने आप की महिला सम्मान योजना की जांच के निर्देश दिए हैं। एलजी के प्रधान सचिव ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी और पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखी। इसमें कहा गया था कि गैर-सरकारी लोगों द्वारा दिल्ली की जनता की निजी जानकारी जुटाई जा रही है। इसकी जांच कराएं और कानून के अनुसार कार्रवाई करें।
आप की इस योजना के जवाब में कांग्रेस ने भी महिलाओं को लुभाने के लिए चुनाव जीतने के बाद प्यारी दीदी योजना लाने का एलान किया है। इसके तहत कांग्रेस ने दिल्ली में सत्ता में आने पर महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह देने का वादा किया है। यानी दिल्ली विधानसभा चुनाव में महिलाओं की आर्थिक मदद का मुद्दा लगातार गर्म रहने वाला है।

चुनाव प्रचार के चेहरे

1. अरविंद केजरीवाल
इस बार नई दिल्ली सीट से अरविंद केजरीवाल फिर मैदान में हैं। वे 2013 से ही आम आदमी पार्टी का नेतृत्व करते हुए पार्टी को जीत दिला रहे हैं। 2013 में दिल्ली विधानसभा के लिए जब चुनाव कराए गए। तब अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित को चुनौती देने की ठानी। वे इस चुनौती में सफल भी रहे और उन्होंने शीला दीक्षित और कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर सरकार बनाने में सफलता हासिल की। 2013 के बाद 2015 और 2020 में भी अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव जीता और लगातार राजधानी के मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए।

2. संदीप दीक्षित
नई दिल्ली सीट से कांग्रेस पार्टी ने पूर्व सांसद एवं शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित को मैदान में उतारा है। पार्टी को भरोसा है कि संदीप यहां से अरविंद केजरीवाल को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। उनकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे 2004 और 2009 में पार्टी के टिकट पर जीतकर लोकसभा सांसद रहे हैं। हालांकि, 2014 में मोदी लहर के दौरान उन्हें अपनी यह सीट गंवानी पड़ी। बाद में पार्टी ने उन्हें संगठन में ही पद सौंपे। हालांकि, शीला दीक्षित के दिल्ली सीएम पद से हटने के बाद कांग्रेस में संदीप दीक्षित धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए।

3. प्रवेश वर्मा
भाजपा ने अपनी पहली सूची में ही प्रवेश वर्मा को नई दिल्ली विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाने का एलान कर दिया। उनके नाम की घोषणा भाजपा के लिए कितना बड़ा कदम थी, यह इसी बात से पता चलता है कि यहां से उनके लड़ने की चर्चा पिछले महीने से ही चल रही थी। इस सीट से पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष सुनील यादव और आम आदमी पार्टी से भाजपा में शामिल हुए विनोद बिन्नी दावेदारी ठोक रहे थे। प्रवेश वर्मा ने दिल्ली में पहली बार 2013 में विधानसभा चुनाव ही लड़ा था। तब वे महरौली सीट से खड़े हुए और उन्होंने योगानंद शास्त्री को हराया था, जो कि दिल्ली विधानसभा में स्पीकर भी रह चुके थे।

4. आतिशी मर्लेना
इस बार के विधानसभा चुनाव में कालकाजी सीट पर हॉट सीट बन चुकी है, क्योंकि यहां से वर्तमान मुख्यमंत्री आतिशी विधायक हैं। यहां आतिशी की पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने पहले ही एलान कर दिया था कि उनकी (नई दिल्ली सीट) और आतिशी की कालका सीट में कोई बदलाव नहीं होगा। 2020 में कालकाजी विधानसभा सीट से आतिशी चुनाव जीती थीं, उन्हें करीब 55,897 वोट मिले थे। आतिशी को सितंबर में ही केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद सौंप दिया था। इसी के साथ वे दिल्ली की तीसरी महिला सीएम बन गई थीं। आम आदमी पार्टी अपने आठ साल के कार्यकाल में जिन उपलब्धियों को सबसे ज्यादा बार गिनाती रही है उनमें शिक्षा का क्षेत्र सबसे ऊपर है और इसका बहुत बड़ा श्रेय आतिशी को जाता है।

5. अलका लांबा
मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता अल्का लांबा को कालकाजी सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। अल्का वर्ष 2013 में कांग्रेस छोड़कर आप में शामिल हो गईं थीं और वर्ष 2015 में चांदनी चौक से विधायक चुनी गईं थीं, लेकिन वर्ष 2019 में उन्होंने फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया। पिछली बार वे कांग्रेस के टिकट पर चांदनी चौक से चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गईं थीं।

6. रमेश बिधूड़ी
भाजपा ने कालकाजी सीट से ही आतिशी को चुनौती देने के लिए रमेश बिधूड़ी को चुनावी मैदान में उतारा है। हाल ही में वे आतिशी को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी कर के घिर चुके हैं। हालांकि, दिल्ली की राजनीति में वे काफी पुराना नाम हैं। उन्होंने 2003 से 2008 तक भाजपा दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके बाद 2008 में वह दिल्ली के भाजपा दिल्ली प्रदेश महासचिव बनाए गए। वह 2003 से मई 2014 तक दिल्ली के विधायक भी रहे। 2014-2019 में लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। विधूड़ी शहरी विकास संबंधी स्थायी समिति और पिछड़े वर्गों के कल्याण संबंधी समित के सदस्य भी रहे हैं।

7. मनीष सिसोदिया
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस बार अपनी पटपड़गंज सीट को छोड़कर जंगपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं। जंगपुरा सीट आप का गढ़ मानी जाती है। कभी कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर 2013 में आप ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। यहां आप के प्रवीण कुमार मौजूदा समय में विधायक हैं। हालांकि, इस बार इस सीट से मनीष सिसोदिया को टिकट दिया गया है।

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