यह कैसा बालश्रम प्रतिबंध, लिखने – पढ़ने की उम्र में करतब दिखाकर संभाल रहे परिवार की जिम्मेदारियां
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
कायमगंज / फर्रूखाबाद :- कहते हैं बचपन हर गम से अंजाना होता है, लेकिन गरीबी की मार बहुत सारे बच्चों को छोटी उम्र में ही लिखने – पढ़ने की जगह दो जून की रोटी कमाने के लिए ऐसे काम करने को मजबूर कर देती है जिसे देखकर हम और आप हैरत में पड़ जाते हैं। पढ़ने – लिखने की उम्र में कई बच्चें सड़कों पर जद्दोजहद करते देखे जाते हैं।
सड़क के किनारे अक्सर छोटे मासूम बच्चे जिस तरह के कारनामे दिखाते मिल जाते हैं वह आपके और हमारे वश के बाहर की बात है। इतने बेहतरीन योग क्रियाएं के करतब दिखाते इन बच्चों को जब आसपास से गुजरने वाले लोग देखते हैं तो बिना पूरा खेल देखे वे यहां से निकल नहीं पाते। गुरूवार को नगर में रिमझिम बारिश के समय दो बच्चे अपने करतब दिखाते नजर आए। करीब दस- बारह साल के बच्चों की जोड़ी भी रोटी जुटाने की जद्दोजहद में अपने परिवार के साथ इस काम को अंजाम देती नजर आई। स्कूल जाने की उम्र में यह बालक हाथों में ढोल बजाते तो दूसरा अचंभित करने वाला योग कई तरह की कलाबाजियां दिखाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। वह करतब दिखाने के बाद वह आकर लोगों की भीड़ में रुपए लेने पहुंच गई। खास बात यह है कि दो हम उम्र परिवार की जिम्मेदारी उठाने को मजबूर हैं दो वक्त की रोटी के लिए बच्चे जान को जोखिम में डालते हैं। बच्ची के करतब दिखाने से लोगों द्वारा जो रुपए मिलते हैं उनसे परिवार के सदस्यों का पेट पलता है।
उचित मंच मिले तो प्रतिभा निखरे
पेट की भूख मिटाने जान जोखिम में डालकर गुरुवार को बच्चों द्वारा जब सड़कों पर
योग क्रियाओ का प्रदर्शन किया गया तो लोग कह रहे थे कि सरकार प्रशासन बालश्रम रोके जाने को दिखावा करती है। अगर इन बच्चों को अच्छा मंच मिले तो भारत में कहीं न कहीं यह अपनी इस उम्र के विजेताओं में कोई ना कोई मैडल अवश्य लाएं।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space

