थाना प्रभारी शमसाबाद खुद को समझता है न्यायाधीश, न्यायालय के आदेश को ठेंगा दिखा करा दिया पत्रकार की पैतृक भूमि पर समुदाय विशेष भूमाफिया का कब्जा
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पुलिस, क्षेत्रीय कानूनगो हरमुख ने मौके पर खड़े होकर कराया कब्जा
लगभग आधा सैकड़ा गुर्गे रहे इर्द गिर्द घूमते, दे सकते थे किसी भी अप्रिय घटना को अंजाम
पत्रकार ने लिखित शिकायती पत्र में दिया था हवाला, हो सकता है जानमाल का खतरा
एक समुदाय विशेष भूमाफिया पर है सत्तापक्ष के छुटभैय्ए नेता का हाथ
शमसाबाद / फर्रुखाबाद :- चांदी के चंद्र टुकड़ों में अपना ईमान बेचने वाले थाना प्रभारी ने आखिर बुजुर्ग वरिष्ठ पत्रकार की भूमि जिस पर न्यायालय में मामला विचाराधीन है, आखिर एक समुदाय विशेष भूमाफिया को कब्जा करा दिया।
अगर आप शमसाबाद क्षेत्र के नागरिक हैं तो थाना प्रभारी रमेश सिंह से न्याय की उम्मीद बिल्कुल ना रखें क्योंकि यह खुद को न्यायाधीश समझ चांदी के चंद टुकड़ों में अपना ईमान बेच देता है। जी हां इसका जीता जगता उदाहरण देखना है तो नगर के वरिष्ठ पत्रकार महेश वर्मा को देख लीजिएगा जिनकी पैतृक भूमि का एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
जिस पर मुन्ना खां नाम का एक दबंग भूमाफिया काफी समय से कब्जा करने का प्रयास कर रहा था। सत्ता पक्ष के एक छुटभैय्ए नेता कथित दलाल ने थाना प्रभारी रमेश सिंह व कानूनगो से साठ गांठ कर लगभग 15 -20 राजमिस्त्री लेबर को साथ लेजाकर बुधवार दोपहर को जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया।
महेश वर्मा ने अपने न्यायालय से संबंधित सभी दस्तावेज दिखाए जिन्हें अनदेखा कर दिया। और कार्य जारी रखा। वरिष्ठ पत्रकार ने बताया कि मै लगातार दो दिनों से पुलिस को घटना के बारे में अवगत करा रहा हूं पर ईमान बेचने वाले थाना प्रभारी ने सब कुछ अनदेखा कर दिया और मेरी कीमती जमीन पर कब्जा करा दिया है।
क्या बोले सोशल मीडिया पर जिम्मेदार
जब सोशल मीडिया एक्स पर सम्बंधित अधिकारियों को घटना की जानकारी हुई तो जवाब लिख दिया कि मामला विविवादित है कार्य रुकवा दिया गया है, जबकि मौके पर लगातार कार्य जारी रहा।
नहीं उठे सीयूजी नम्बर
कुछ पत्रकारों द्वारा घटना के सम्बन्ध में पुलिस अधिकारियों से संपर्क करना चाहा तो उनके नम्बर पर रिंग जाने के बाद भी कॉल रिसीव नहीं हुई।
शमसाबाद में रामराज एक मात्र कल्पना
एक समुदाय विशेष भूमाफिया मुन्ना खां द्वारा जब पत्रकार की भूमि पर कब्जा पुलिस और कानूनगो हरमुख द्वारा कराया जा रहा था तो वहां लोग कह रहे थे कि यही असली रामराज है यहां हंस नहीं कौआ मोती खाते हैं। इस सरकार में माफिया और प्रशासन मिलकर लूट मचा रहे हैं।
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