बनारस पुलिस द्वारा बिना खून खराबे का यह हॉफ एनकाउंटर क्राइम कोर्स बनाकर पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए!
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Desk :- बनारस में कमिश्नर मोहित अग्रवाल की पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लगी, जब अदृश्य गोली मारकर मनीष सिंह हत्याकांड के दो आरोपियों को घायल कर दिया गया। पुलिस ने जब दोनों के पैरों में अदृश्य गोली मारी तो अदृश्य खून निकलने लगा, जिसे सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं था। मुंहजुबानी गोली लगते ही दोनों बदमाश इस तरह गिरे कि सीधे लेट गये। पुलिस दोनों के अदृश्य घाव पर उज्जर रुमाल बांधकर अस्पताल ले गई, जहां डाक्टर अदृश्य इलाज करने में जुटे हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक फूलपुर पुलिस और एसओजी को सूचना मिली कि मनीष सिंह की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी करखियांव इंडस्ट्रियल एरिया में छुपे हुए हैं। पुलिस जब इंडस्ट्रियल एरिया में पहुंची और उन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा तो दोनों गोली चलाकर भागने लगे।
गोली किसी भी पुलिस वाले को नहीं लगी, क्योंकि एक पुलिस वाले ने एक गोली को चप्पल से मारकर गिरा दिया, जबकि दूसरी गोली का दूर तक पीछा करने के बाद भी हाथ नहीं आई, अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकली।
दोनों आरोपियों को भागते देख मोहित अग्रवाल की पुलिस ने मुंह से तीन चार बार ठांय ठांय ठांय किया। ठांय ठांय की आवाज सुनते ही आरोपी अपना पैर ठांय ठांय की लाइन में लेकर गये, जिससे मुंहजुबानी गोली उनके पैरों में धंस गई। दोनों हत्यारोपी आभासी तौर पर घायल हुए और इस तरह गिरे कि सीधे लेट गये। इस मुठभेड़ की सबसे अच्छी बात रही कि कहीं खून खराबा नहीं हुआ। बदमाशों के गोली चलाने पर ना तो पुलिस को कहीं से खून निकला, और ना ही पुलिस के गोली से बदमाशों को कहीं से खून निकला।
बिना खून खराबे के हुए इस हॉफ एनकाउंटर के बाद जितने भी हॉफ लोग हैं, वह वाराणसी की हॉफ पुलिस को फूल बताकर जमकर सराहना कर रहे हैं। वाराणसी पुलिस की तारीफ में लोग कसीदे पढ़ रहे हैं, और कह रहे हैं कि बिना किसी खून खराबे के मुंहजुबानी अदृश्य गोली मारकर दो आरोपियों को पकड़ने की इस ऐतिहासिक मुठभेड़ को पेटेंट कराये जाने की जरूरत है। बिना खून खराबे के इस हॉफ एनकाउंटर को क्राइम कोर्स बनाकर उसे पाठ्यक्रम शामिल किया जाये।
मैं भी इस तरह के हॉफ मुठभेड़ों का प्रशंसक रहा हूं. संभल में जब पहली बार यूपी पुलिस ने मुंह से ठांय ठांय कर 25 हजार के ईनामी को पकड़ा था, तब मैं इतना प्रसन्न हुआ था कि खुद को शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित कर लिया था. अब जब बनारस पुलिस ने बिना एक बूंद खून गिराये अदृश्य एवं मुंहजुबानी एनकाउंटर किया है तो मुझे जो प्रसन्नता हुई है वह कोई महसूस नहीं कर सकता है, आज मैं खुद को फिर से सम्मानित करूंगा. और भगवान से गुजारिश करूंगा कि ऐसे हॉफ पुलिस वालों को अदृश्य मामले में फुल उठा लें.
काश कोई डाइरेक्टर इस हॉफ एनकाउंटर को देख लेता तो इस पर फुल फिल्म बनाकर बनारस पुलिस के इस काम को अजर अमर कर देता. वाह जोगी जी वाह.
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