कैलेंडर से नहीं पंचांग से समझी ऋतु परिवर्तन होली से पहले चढ़ने लगा तापमान
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फर्रुखाबाद :- फरवरी का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है। इसके साथ ही मौसम ने भी करवट बदल ली है दिन में अब चटख धूप गर्मी तो रात में गुलाबी सर्दी का अहसास होता है। पारा लगभग 32 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है हालांकि बढ़ते तापमान को गर्मी की आहट मानने से पहले भारतीय पंचांग का भी अध्ययन करने की जरूरत है।पंचांग बताता है कि ऋतुओ का परिवर्तन कब होगा। इसके अनुसार जब जैसे-जैसे फागुन का महीना आगे बढ़ता है तापमान भी चढने लगता है और होली के बाद ग्रीष्म काल की शुरुआत हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों में ही होली के समय दर्ज अधिक तापमान इसका प्रमाण है उदाहरण के तौर पर वर्ष 2018 में 2 मार्च को होली मनाई गई और वर्ष 2019 में 27 मार्च को दोनों बसों में होली के आगमन में 25 दिन का अंतर होने के बावजूद तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहा। शिक्षक स्वतंत्र पत्रकार संजीव कुमार गंगवार बताते हैं कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार होली की तिथि भले ही भिन्न-भिन्न हो लेकिन इस त्यौहार का मतलब गर्मी के शुरू होने के औपचारिक घोषणा की है ।शीतकाल का अंतिम माह फागुन को माना गया है ।चैत्र माह से सूरज तपने लगता है यही वजह है कि मार्च के शुरू या अंत में जब भी होली का अवसर आता है तो गर्मी बढ़ने लगती है।
सूर्य व चंद्रमा की गति से तय होती है तिथियां
भारतीय पंचांग में ऋतुओं के साथ संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक मास की व्यवस्था है।ज्योतिष विधि के जानकार बताते हैं कि सूर्य गति के आधार पर वर्ष जबकि चंद्रमा की गत के आधार पर माह की गणना की जाती है। क्योंकि सूर्य वर्ष 365 दिन का होता है और चंद्रवंश 354 से 360 दिन का। इस लिहाज से हर साल करीब 5 से 11 दिनों का अंतर आ जाता है। हर तीन साल में यह अंतर करीब एक माह के बराबर हो जाता है। इस अंतर को खत्म करने के लिए ही हिंदी पंचांग में अधिक मास की व्यवस्था की गई है। जिस वर्ष अधिक मास रहता है उसमें 12 नहीं बल्कि 13 महीने होते हैं। इस तरह अगर अधिक मास की व्यवस्था ना होती तो सभी त्योहारों की ऋतुए बदलती रहती। जैसे होली कभी सर्दी तो कभी गर्मी कभी वर्षा काल में आने लगती। यही वजह है कि हिंदी पंचांग की गणना की सटीकता इसे अंग्रेजी कैलेंडर में ज्यादा बेहतर बनाती है।
होली पर 25 से 38 डिग्री के बीच रहता है तापमान
कई वर्षों में होली से पहले गर्मी बढ़ने की पुष्टि मौसम विभाग के आंकड़े भी करते हैं पांच साल पहले 2018 में 2 मार्च की होली मनाई गई उस दिन भी अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि 2019 में 21 मार्च को होली थी तब तापमान 32.2 डिग्री सेल्सियस था 2013 में होली 27
मार्च को मनाई गई और अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री रहा केवल 2020 में 10 मार्च को होली के दिन अधिकतम तापमान 20.6 डिग्री सेल्सियस रहा।
विभिन्न वर्षों में होली पर रहा अधिकतम तापमान
20 मार्च 2011 में 35.6, 8 मार्च 2012 में 28.8, 27 मार्च 2013 में 32.6 ,17 मार्च 2014 में 33 ,6 मार्च 2015 में 26, 24 मार्च 2016 में 34.6, 13 मार्च 2017 में 25.7,02 मार्च 2018 में 32.6, 21 मार्च 2019 में 32.4, 10 मार्च 2020 में 20.6, 29 मार्च 2021 में 38.8 ,18 मार्च 2022 में 35.5 तापमान डिग्री सेल्सियस में रहा है।
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