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झोलाछाप के इलाज और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने ली एक और जान

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– झोलाछाप पर भरोसा पड़ा भारी, समय पर इलाज न मिलने से गई युवक की जान
– स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से गांवों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध क्लीनिक

कायमगंज / फर्रूखाबाद :-  क्षेत्र में झोलाछाप चिकित्सकों पर कार्रवाई न होने और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता का खामियाजा एक 36 वर्षीय युवक को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। गांव में झोलाछाप चिकित्सक से इलाज कराने के बाद हालत बिगड़ने पर परिजन निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां भर्ती से मना कर दिया गया। अंततः सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कायमगंज पहुंचने पर चिकित्सकों ने युवक को मृत घोषित कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, रामरहीस (36) पुत्र इच्छाराम निवासी ग्राम बराबिकू को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। परिजनों ने उसे गांव में ही एक झोलाछाप चिकित्सक से दवा दिलाई, लेकिन हालत में सुधार होने के बजाय लगातार बिगड़ती गई। गंभीर स्थिति होने पर परिजन उसे नगर के एक निजी चिकित्सक के यहां लेकर पहुंचे, जहां उसकी हालत नाजुक बताते हुए भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद परिजन आनन-फानन में उसे सीएचसी कायमगंज लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया।मौत की खबर सुन साथ आए परिजन रोने लगे और मृतक के शव को घर ले गए।
क्षेत्र में लंबे समय से बिना डिग्री और बिना पंजीकरण के झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा इलाज किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण ऐसे अवैध क्लीनिक बेखौफ संचालित हो रहे हैं। ग्रामीण मजबूरी और जागरूकता के अभाव में इन्हीं झोलाछाप चिकित्सकों के भरोसे इलाज कराते हैं, जिससे कई बार मरीजों की जान तक चली जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई करे और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए, तो ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि यह खबर सूत्रों की जानकारी पर आधारित है। झोलाछाप चिकित्सक की भूमिका और मृत्यु के वास्तविक कारण की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की जांच अथवा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही की जा सकती है।

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