नव संवत्सर अभिनंदन गोष्ठी का आयोजन
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कायमगंज/फर्रुखाबाद ;- चैत्र प्रतिपदा पर नव संवत्सर के अभिनंदन के लिए विश्व बंथु परिषद द्वार आयोजित गोष्ठी में साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त किए । प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के इशारे पर आसुरी शक्तियां सनातन वैदिक धर्म और संस्कृति पर प्रहार कर रही हैं ।इन्हें नेस्तनाबूद करने के लिए एक अदद शकार्य विक्रमादित्य की आवश्यकता है ।उन्होंने कहा कि सृष्टि प्रकृति सर्जना धर्म संस्कृति का पावन प्रथम दिवस है ।ग्रह नक्षत्र की गति का स्थिति का वैज्ञानिक संवत्सर है । विश्व कालगणना के भ्रामक कैलेंडरो का त्याग करो तुम ।भारत की शाश्वत ज्योतिष के अभिनंदन का यह अवसर है।
गीतकार पवन बाथम ने कहा कि
पग पग पर देता रहे सुख वैभव सम्मान ।
भारतीय नव वर्ष की अमर निराली शान ।।
हवा वसंती बह रही मिला प्रकृति का संग ।
आम्र विटप बौरा गए,खिले अंग प्रत्यंग ।।
नई भौजिया मांगती ,खट्टे खट्टे आम ।
आने वाला है कोई देती है पैगाम ।।
उपवन उपवन खिल गए रंग बिरंगे फूल ।
चटकी कलियां झूमती मौसम है अनुकूल ।।
प्रोफेसर कुलदीप आर्य ने कहा कि
आर्य पराक्रम शौर्य के तेजस्वी आदित्य।
आओ तुम एक बार फिर वीर विक्रमादित्य ।।प्रधानाचार्य शिव कांत शुक्ला ने कहा कि वर्ष प्रतिपदा का बंधन है।
नव संवत्सर का अभिनंदन है।
कालजई सिद्धांत दे गए ऋषि यों को सौ बार नमन है।। हंसा मिश्रा ने कहा कि चैत्र प्रतिपदा पर करो आदिशक्ति का ध्यान ।गूंजे सारे विश्व में अभिनव मंगल गान ।।मनीष गौड़ ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किए हमने सारे विश्व को दिए दिव्य संदेश ।
ओम शांति से मिटेंगे मानव के सब क्लैश।।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जेपी दुबे ने कहा कि विश्व शक्ति को भारत उन्नत मन उन्नत सिर ।
सारी दुनिया में लागू हो नव संवत्सर ।।
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