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3 वर्ष 4 माह और 25 वें दिन आकांक्षा हत्या कांड में आरोपियों को पुलिस ने लिया हिरासत में

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शमसाबाद /फर्रुखाबाद :-  आकांक्षा हत्याकांड में नामित आरोपियों को पुलिस ने तीन साल चार माह पच्चीसवे दिन होली से पूर्व हिरासत में ले लिया लेकिन इस संबंध में जानकारी की गई तो थाना पुलिस ने बताया कि इटावा से मामले की जांच चल रही है वहां की पुलिस आई थी जो पूछताछ के लिए आरोपियों को अपने साथ ले गई है।
आपको याद होगा क्षेत्र के गांव किसरोली में 13 अक्टूबर 2019 को छात्रा आकांक्षा दुष्कर्म के बाद निर्मम हत्या कर उसके सब को नग्न अवस्था में गांव से लगभग 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया था 14 अक्टूबर 2019 को ग्रामीणों ने सब को देखा जिसकी सूचना पर तत्कालीन थाना अध्यक्ष रामबाबू अपने हमराही के साथ पहुंचे थे उन्होंने शव का पोस्टमार्टम कराकर उसका दाह संस्कार परिजनों को बहला-फुसलाकर करा दिया था और आश्वासन दिया था की आप दाह संस्कार करके आइए आप की रिपोर्ट लिख कर जांच की जाएगी। बाद में तत्कालीन थाना प्रभारी रामबाबू ने रिपोर्ट लिखने से इनकार कर दिया जिसकी लिखित शिकायत एडीजी कानपुर प्रेम प्रकाश जो दौड़े पर फतेहगढ़ आए थे उनसे की गई तो उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी रामबाबू आरोपियों से सांठगांठ करने में सिपाही अंकित को निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया था और आदेश दिया था कि पीड़िता की रिपोर्ट दर्ज कर निष्पक्ष कार्यवाही की जाए कुछ समय तक तो जाट सही चली किंतु उनका स्थानांतरण होने के बाद जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया जिसकी लिखित शिकायत पीड़ित के पिता शिव कुमार द्वारा भाजपा के कई कद्दावर मंत्रियों नेताओं के साथ-साथ कई उच्चाधिकारियों से की गई लेकिन गरीबी के कारण उसको न्याय नहीं मिल पाया इतना ही नहीं जब न्याय की आस टूटी तो उसके पिता ने फतेहगढ़ पानी की टंकी पर चढ़कर न्याय ना मिलने पर आत्महत्या करने का प्रयास किया था जहां पर उसे जांच का आरोपियों की गिरफ्तारी हेतु आश्वासन मिला था केंद्र इस हत्याकांड में ना तो अभी तक कोई भी आरोपी गिरफ्तार है और ना ही किसी आरोपी को जेल भेजा गया पूर्व में बसपा में रहे एक विधायक के ऊपर आरोप लगाते हुए पीड़ित के पिता ने माननीय मुख्यमंत्री योगी को एक पत्र भेजा था जिसमें उन्होंने तत्कालीन थानाध्यक्ष धनजन लाल सोनकर द्वारा थाने पर बुलाकर एक कमरे में ले जाकर पुलिस अधीक्षक पर भरोसा नहीं है मेरी पुलिस कानपुर द्वारा जांच कराई जाए और तो सादा कागजों पर दस्तखत कराए मैंने कभी भी नारको टेस्ट कराने से मना नहीं किया बल्कि सिर्फ यह लिखा था कि पहले आरोपियों के टेस्ट कराए जाएं उसके बाद मेरे और मेरे परिवार वालों के कानपुर से आई फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर कोई डेमो परीक्षण नहीं किया और झूठी रिपोर्ट राजनैतिक दबाव के चलते लगा दी । पीड़ित पिता शिवकुमार ने माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग करते हुए कहा है की निम्न बिंदुओं पर जांच कराई जाए।
मेरी पुत्री का शव रेल से कटने के बाद उसके वस्त्र कहां गए उसके कटे हुए पैरों की तलाश पुलिस ने क्यों नहीं की उसके आधे क्षत-विक्षत शव को पोस्टमार्टम के लिए क्यों भेजा। रेल से कटने के बाद कटा हुआ हिस्सा काला पड़ जाता है लेकिन मेरी पुत्री के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ घटनास्थल पर रक्त व मांस के लो थोड़े क्यों नहीं मिले मेरी पुत्री के प्राइवेट पार्ट्स में 6 पॉइंट 4 इंच का जन्म कैसे हुआ हत्या का आरोप लगाने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी रामबाबू ने डॉग स्क्वायड व फील्ड यूनिट क्यों नहीं बुलाई फरियाद करने के बावजूद भी मेरी रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई जब रेलवे घटना से इंकार कर रही है तो पुलिस ट्रेन से कटकर आत्महत्या किस तरह बता रही है पुलिस द्वारा मुझे व मेरे परिवार को सुरक्षा प्रदान क्यों नहीं की गई जिस कारण मुझे अपने परिवार सहित गांव से पलायन करना पड़ा। सूत्रों की माने तो पीड़ित परिवार को आरोपियों द्वारा धमकी मिल रही थी जिस कारण उसका परिवार गांव से पलायन कर गया। 3 वर्ष 4 माह और 25 वे दिन इटावा पुलिस द्वारा हत्या में आरोपित किए गए युवकों को पुलिस ने होली के 1 दिन पूर्व अपनी हिरासत में ले लिया तो गांव में चर्चा शुरू हो गई कि कहीं ऐसा ना हो कि यह लोग अब जेल चले जाएं वही जब इस संबंध में थाना पुलिस से जानकारी चाहिए तो उन्होंने बताया कि इटावा पुलिस जांच के लिए आई थी वह आरोपियों को अपने साथ ले गई या नहीं यह हम कुछ भी नहीं बता सकते अब देखना यह है कि क्या मृतिका आकांक्षा के पिता को योगी के शासन में न्याय मिलेगा या जांच अभी भी यही इसी तरह चलती रहेगी।

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