यज्ञ श्रेष्ठतम कर्म है, तो मान यज्ञ का फल – संजीव रूप
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कायमगंज / फर्रूखाबाद :- शनिवार को आर्य समाज के 146 वें वार्षिकोत्सव के द्वितीय दिवस का शुभारंभ प्रातः कालीन यज्ञ अनुष्ठान के साथ हुआ ,जिसमें तीन यज्ञ वेदी पर यज्ञ अनुष्ठान के साथ हुआ जिसमें तीन यज्ञ वेदी पर 12 यजमानों रवि गुप्ता – पूनम गुप्ता, नीरज – अनीता संजय रस्तोगी – प्रतीक रस्तोगी, निदेश गौड़ – इंदु गौड़,सत्येश चंद्र गौड़-विदुषी गौड़, अमित अग्रवाल- मोनिका अग्रवाल, दीपक राज- अंजू अरोरा, शरद गंगवार- रीता गंगवार
,दिनेश गंगवार- स्नेहलता गंगवार,
प्रदीप सक्सेना- नीता सक्सेना
आकाश पाल – स्फूर्ति बघेल द्वारा सपत्नीक वैदिक मंत्रों से पावन आहुतियां विश्व शांति और समृद्धि की कामना से दीं गईं। यज्ञ का आयोजन आचार्य चंद्रदेव शास्त्री के संरक्षण एवं आचार्य राम किशोर मेदार्थी के ब्रह्मत्व में संपन्न हुआ। द्वारा सपत्नीक वैदिक मंत्रों से पावन आहुतियां विश्व शांति और समृद्धि की कामना से दीं गईं। यज्ञ का आयोजन आचार्य चंद्रदेव शास्त्री के संरक्षण एवं आचार्य राम किशोर मेदार्थी के ब्रह्मत्व में संपन्न हुआ। द्वारा सपत्नीक वैदिक मंत्रों से पावन आहुतियां विश्व शांति और समृद्धि की कामना से दीं गईं।
यज्ञ का आयोजन आचार्य चंद्रदेव शास्त्री के संरक्षण एवं आचार्य राम किशोर मेदार्थी के ब्रह्मत्व में संपन्न हुआ। यज्ञ अनुष्ठान के उपरांत सभी यजमानो का सम्मान ,वैदिक विद्वानों द्वारा अंग वस्त्र एवं सत्यार्थ प्रकाश भेंट करके किया गया। वैदिक प्रवचन में आचार्य रामकिशोर मेदार्थी के कुशल संचालन में सर्वप्रथम भजन उपदेशक आचार्य संजीव रूप जी द्वारा यज्ञ और यजमान की सरल व्याख्या करते हुए बताया कि यज्ञ श्रेष्ठतम कर्म है, तो मान यज्ञ का फल है । अर्थात यज्ञ का फल है। यज्ञ एक विज्ञान है , वैदिक अनुसंधान है।। इस संगीतमय गीत से आचार्य जी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। दूसरे वक्त के रूप में आचार्य चंद्रदेव शास्त्री के यज्ञ के सोपान देव पूजा और संगति करण की सरल व्याख्या करते हुए स्वाहा शब्द को यज्ञ का प्राण बताया। जिसका अर्थ , अपना सब कुछ परमात्मा को अर्पण कर देना। भ अलका आर्या ने “सबके पलक सबके दाता ” गीत से परमात्मा के कर्मों के महत्व और भक्ति को सरलता से समझाया। आचार्य चंद्रदेव ने ईश्वर के प्रमुख नाम सच्चिदानंद की सरल व्याख्या करते हुए ईश्वर के स्वरूप को समझाया। इस प्रकार प्रातः कालीन सत्र का समापन हुआ हुआ कार्यक्रम में आर्य समाज के सभी पदाधिकारी सदस्यों की उपस्थिति रही।
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