मेहंदी घाट पर 15 डाल्फिन की अठखेलियां, 12 किमी क्षेत्र बनेगा टूरिज्म जोन
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- कन्नौज के मेहंदी घाट पर 15 डॉल्फिन देखी गईं।
- 12 किमी क्षेत्र में डॉल्फिन टूरिज्म विकसित होगा।
- संरक्षण हेतु मोटरबोट पर प्रतिबंध, डॉल्फिन मित्र बनेंगे।
कन्नौज :- कन्नौज में गंगा नदी में 15 डाल्फिन देखी गई हैं। मेहंदी घाट के हर रोज शांत माहौल में अठखेलियां करती नजर आती हैं। अब प्रशासन डाल्फिन टूरिज्म को बढ़ावा देने जा रहा है।
गंगा नदी में डाल्फिन को देखने व संरक्षण के लिए लगभग 12 किमी क्षेत्र में डाल्फिन टूरिज्म विकसित किया जाएगा। मेहंदी घाट के शांत वातावरण के बीच गंगा में 15 डाल्फिन पाए जाने के बाद वन विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। वर्ष 2024 में यहां डाल्फिन की संख्या छह थी।
मई में डेवलप किया जाएगा डाल्फिन टूरिज्म
विभाग अगले माह से इस क्षेत्र में गंगा नदी किनारे सफाई कराएगा। इसके बाद बैरिकेड्स लगाकर पक्के प्वाइंट बनाए जाएंगे, जहां खड़े होकर लोग आसानी से दूरबीन के जरिए डाल्फिन को देख सकेंगे। वन विभाग इसमें लगभग 20 लाख रुपये खर्च करेगा। काम 2027 के जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य है। गंगा में कानपुर, उन्नाव व फतेहपुर के साथ इटावा में चंबल नदी में भी डाल्फिन हैं, इन्हें गंगा डाल्फिन के नाम से जाना जाता है।
डाल्फिन देखने जुटते हैं लोग
वर्तमान में मेहंदी घाट से दाईपुर घाट तक डाल्फिन को अठखेलियां करते देखने के लिए प्रतिदिन शाम को लोग जुटते हैं। वन विभाग की टीम नाव से इनकी निगरानी करती है, ताकि कोई उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सके। इस क्षेत्र में अनुमति प्राप्त पतवार से चलाई जाने वाली नाव ही चलेंगी, नाविकों को नौका विहार करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस तरह से जुटाया आंकड़ा
प्रभागीय वन अधिकारी डा. हेमंत सेठ ने बताया कि जीपीएस की मदद से नमामि गंगे व वर्ल्ड वाइल्ड टीम ने 27 जनवरी, 2020 को बिजनौर से गंगा विहार यात्रा निकाल कर डाल्फिन की खोज शुरू की थी, तब कन्नौज तक 35 डाल्फिन पाई गईं थी। इसमें सबसे अधिक मेहंदी घाट व दाईपुर घाट में इनकी संख्या है।
नाव का संचालन पर कार्रवाई
गंगा किनारे रहने वाले नाविकों ने देसी नाव में मोटर लगा रखी है। इनके एक्सल में लगे धारदार ब्लेड के चलने से धारा में नाव तेज भागती है। इस ब्लेड की चपेट में आकर डाल्फिन घायल हो सकती हैं, इसलिए ऐसी नाव का संचालन करने वाले नाविकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। गंगा नदी में डाल्फिन का कुनबा इस क्षेत्र में बढ़ रहा है।
पर्यावरण संरक्षण व पर्यटन को बढ़ावा
पर्यटन व संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए गंगा किनारे रहने वाले ग्रामीणों को डाल्फिन मित्र भी बनाएंगे। इसी तरह, कम प्रदूषण, सुरक्षित वातावरण व पानी के धीमे बहाव के कारण इटावा में सबसे अधिक पचनद (यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी व पहुज नदियों का संगम स्थल) में 70 डाल्फिन वर्तमान में हैं।
गंगा के इस क्षेत्र में डाल्फिन की संख्या लगातार बढ़ रही है, क्योंकि यहां का पानी स्वच्छ है। इसमें नौका विहार करने पर भी डाल्फिन आसानी से दिख जाती हैं। जल्द डाल्फिन टूरिज्म के विकास से पर्यटकों को उनका दीदार हो सकेगा।
– आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, जिलाधिकारी
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