कर्ज के साए में डूबे आलू किसान, होली के त्योहार पर बेहद परेशान
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शमसाबाद/फर्रुखाबाद :- मंदी के दौर से जूझ रहे आलू किसनो ने अपनी ही बर्बादी पर अफसोस जताते हुए कहा गरीबी के दौर से गुजर रहे गरीब किसानो का इस बार होली का त्योहार मनाना मुश्किल होगा।
उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद में किसानों द्वारा हजारों लाखों रुपए की लागत से आलू की फसल तैयार की थी और जब फसल पककर मंडी पहुचीं तो ओंधे मुहं गिर गई । परिणाम आलू किसानों की लागत निकलना तो दूर मेहनत मजदूरी का भी निकलना मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालातों में कर्ज के साए में डूबे आलू किसान होली के त्योहार पर बेहद परेशान ।नजर आ रहे हैं मायूसियों के दौर से गुजर रहे किसानों ने अफसोस जताते हुए कहा खुशहाली के सपने देखने वाले गरीब किसानों का दाव इस बार उल्टा पड़ गया। बाजार की मंडियों में आलू ओने पौने के भाव विक्रय किया जा रहा है। जिसमें लागत तो दूर मेहनत मजदूरी भी नहीं निकल रही है। यही हालात शमसाबाद क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में देखा जा रहा है । जहां उज्जवल भविष्य की कामनाओं के साथ आलू की खेती करने वाले किसान इस बार बार खुद की बर्बादी का नजारा देख रहे हैं। होली का त्योहार नजदीकियो को लेकर जब कुछ आलू किसानों से जानकारी दी गई तो किसान राजेश कुमार दयाराम सीताराम शिवपाल बृजेश कुमार संजीव कुमार आदि ने बताया इस बार किस्मत ने धोखा दिया वैसे तो आलू उत्पादन के नाम पर हजारों लाखों रुपए दाव पर लगाए थे। खाद बीज पानी मेहनत भी खूब की और जब खुदाई का नंबर आया तो बाजार में यही आलू भाव औंधे मुंह गिर पड़ा किसानों के अनुसार फसल के लिये अधिकाँश संपन्न किसानों से उधसरी के तौर पर पैसा लिया गया था। इस शर्त पर फसल तैयार होते ही मार्केट में बिक्रय कर पहले उन्हीं का कर्जा दिया जाएगा। किसानों को अफसोस है जब मेहनत मजदूरी ही नहीं निकल रही है तो धनाढ्य किसानो का ऋण कैसे चुकाया जाए। कुछ किसानों ने बताया जिन किसानों ने पैसा दिया था बो भी तकादा करने लगे हैं। मायूस किसानों का कहना है समझ नहीं आता आखिर उधार लिया गया पैसा कहा से दिया जाए। कुछ किसानों ने बताया बाजार में आलू मंदी के दौर से गुजर रहा है भविष्य की उम्मीदों के साथ क्षेत्र के शीत ग्रहों में भंडारण के लिये लगे हुए हैं। मगर अत्यधिक आमद पर शीत गृह स्वामी भी भंडारण के लिये ठेंगा दिखा रहे है आलू भंडारण के लिए लाइन में लगकर इंतजार करने वाले किसान बेहद परेशान हैं। ओर गेट के खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है भंडारण की आस में दिन दुपहरी गुजरने बाले किसानों ने बताया सुबह से दोपहर दोपहर से शाम हो जाती । मगर शीत ग्रह का गेट नहीं खुलता कभी-कभी ट्रैक्टर ट्रॉली के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है उधर मंदी के दौर से गुजर रहे किसानों ने बताया रंगों का त्योहार होली पर्व जिसे मनाना दुश्वार हो रहा है क्योंकि आर्थिक दौर में मंदी के दौर से गुजर रहे हैं आलू किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई ऐसे में होली का त्यौहार कैसे मनाया जयेगा। इस बार होली का त्यौहार मनाया जाना आसमान से तारे तोड़ने जैसा लग रहा है।
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