सदगुरु व सत्संग की शरण में जाकर ही आनंद की प्राप्ति – जगदगुरू
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कायमगंज/फर्रुखाबाद
श्री राम कथा रस बरसा के षष्ठम दिवस पर परमपूज्य जगदगुरु कथावाचक श्री रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि मनुष्य मोह माया में पड़कर सत्संग से दूर जा रहा है जिससे वह अपने जीवन के आनंद को भूल रहा है।
नगर के मोहल्ला गंगादरवाजा स्थित गायत्री धाम शिवाला भवन के प्रांगण में 44 वा श्री राम कथा मानस सम्मेलन का आयोजन के षष्ठम दिवस पर परम पूज्य जगदगुरु श्रीरामदिनेशाचार्य ने कहा कि व्यक्ति भौतिक सुविधाओं की दौड़ में ईश्वर की पूजा तो करता है किंतु मोह माया में पड़ने के कारण वह आनंद से दूर जा रहा है ईश्वर को प्राप्त करने के लिए सद्गुरु की शरण बात सत्संग का आचरण बहुत जरूरी है। वहीं उन्होंने कहा की ब्रह्मपुत्र महाराजा दक्ष को पद और मोह माया का मकड़जाल जब पड़ा तो उन्होंने माता सती व भगवान शिव का उपहास कराने के लिए सभी देवी देवताओं को पूछा किंतु अपनी ही पुत्री को आमंत्रित नहीं किया जिसके कारण उन्हें अपना शीश तक गंवाना पड़ा और माता सती जैसी देवी को भी सती होना पड़ा था कथा का बहुत ही सुन्दर वर्णन किया।
वाराणसी से पधारे राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉक्टर हीरामणि जी ने कहा कि पश्चाताप की आग में जले बना जीवन के सुख का आनंद प्राप्त नहीं किया जा सकता। माता सती जी ने अपने जीवन से स्पष्ट किया कि परमात्मा से सर्वंश है। इस अवसर पर श्री सत्य प्रकाश जी अग्रवाल अध्यक्ष रमाकांत शुक्ला,पवन गुप्ता,दीपक राज अरोड़ा,मनोज कौशल,अमित सेठ,सुधीर गुप्ता,अभिषेक पोरवाल,सोनू रस्तोगी आदि उपस्थित रहे।
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