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SP आरती सिंह ने उच्च न्यायालय में माफी मांगी, दो लोगों को सात दिन अवैध हिरासत में रखा, अधिवक्ता के घर में तोड़फोड़ की थी

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प्रयागराज / फर्रूखाबाद  :- इलाहाबाद हाईकोर्ट में बुधवार को फर्रुखाबाद की पुलिस अधीक्षक (SP) आरती सिंह की पेशी हुई। हैबियस कॉर्पस मामले में एसपी ने कोर्ट में हलफनामा देकर माफी मांगी। जिसमें उन्होंने कहा- पूरे मामले की जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने इस मामले में फैसले को सुरक्षित रख लिया है। अभी तारीख तय नहीं हुई है। इससे पहले मंगलवार को भी एसपी की कोर्ट में पेशी हुई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जेजे मुनीर ने दो लोगों को सात दिन अवैध हिरासत में रखने और वकील व उनके बेटे को कोर्ट कैंपस से हिरासत में लिए जाने पर नाराजगी जताई। मौखिक तौर पर उन्हें हिरासत में लेने का भी आदेश दिया था। हालांकि बाद में एसपी को पीड़ित वकील अवधेश मिश्रा और उनके बेटे की रिहाई तक अदालत में ही रुकने को कहा गया।

हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह के अनुसार, कोर्ट में बुधवार दोपहर  दो बजे कुल चार मामलों की सुनवाई हुई।

पहला- हैबियस कॉर्पस
दूसरा- याचिकाकर्ता से थाने में जबरन ये लिखवाना कि अब कोई शिकायत नहीं करेंगे
तीसरा- अधिवक्ता ​​​​​​अवधेश मिश्र के घर तोड़फोड़
चौथा- कोर्ट परिसर से अधिवक्ता अवधेश मिश्र और उनके बेटे को अरेस्ट करना।
उन्होंने बताया- कोर्ट ने चारों प्रकरणों पर सुनवाई की। अभिलेखों को देखा। दोनों पक्षों को सुना। इसके बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया। उन्होंने बताया कि कोर्ट में एसपी ने माफी मांगी। उन्होंने हलफनामा दे दिया है, अब वह प्रयागराज छोड़ सकती हैं।

अब विस्तार से जानें पूरा मामला

पुलिस ने दो लोगों को सात दिन तक अवैध हिरासत में रखा था एडवोकेट संतोष पांडे ने बताया, हमने फर्रुखाबाद निवासी प्रीति यादव की तरफ से एक हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की थी। फर्रुखाबाद की कायमगंज थाने की पुलिस आठ सितंबर की रात करीब नौ बजे प्रीति के घर में घुस गई।

पुलिस टीम में थाना प्रभारी अनुराग मिश्रा, सीओ समेत चार-पांच पुलिसकर्मी शामिल थे। वह लगातार एसपी फतेहगढ़ (फर्रुखाबाद) से बातचीत कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने प्रीति के परिवार के दो सदस्यों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दोनों लोगों को करीब एक सप्ताह तक हिरासत में रखा। फिर 14 सितंबर की रात 11 बजे पुलिस ने दोनों को छोड़ दिया।

उन्होंने बताया, दोनों लोगों को छोड़ने से पहले पुलिस ने दबाव में एक लिखित बयान लिखवा लिया। जिसमें लिखवाया कि हमने कोई मुकदमा नहीं किया। हमें कोई शिकायत नहीं है और न ही किसी तरह की शिकायत करेंगे। पुलिस ने यही जवाब हाईकोर्ट में लगा दिया।
कोर्ट ने पुलिस की बात नहीं मानी, पिटीशनर को बुलाया हाईकोर्ट ने पुलिस की बात नहीं मानी। कोर्ट ने मेन पिटीशनर प्रीति को बुलाया। उनकी सारी बातें सुनीं। इसके बाद कोर्ट ने नौ अक्टूबर को आदेश जारी किया। कोर्ट ने 14 अक्टूबर को दोपहर दो बजे तक एसपी फतेहगढ़, सीओ कायमगंज और एसएचओ कायमगंज को अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया।

इसके बाद 11 अक्टूबर को करीब 100 पुलिस वाले फर्रुखाबाद के रहने वाले वकील अवधेश मिश्र के घर पहुंचे। वहां तोड़फोड़ की। सामान फेंक दिया। सीसीटीवी तोड़ा, डीवीआर उठा ले गए। इसके बाद अवधेश मिश्र की तरफ से कोर्ट में एफिडेविट फाइल किया।

उस पर मंगलवार को जस्टिस जेजे मुनीर और संजीव कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई की। इस दौरान एसपी और उनकी टीम कोई जवाब नहीं दे सकीं।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी माना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने बताया, मंगलवार को कोर्ट में याचिकाकर्ता प्रीति यादव का बयान दर्ज हुआ। उन्होंने कोर्ट में सभी बातें बताईं। बताया कि पुलिस वालों ने उन्हें धमकी दी और जबरन एक कागज में लिखवा लिया कि हमने कोई केस नहीं किया है।

इसको लेकर कोर्ट ने एसपी से जवाब मांगा। मगर एसपी और उनकी टीम कोर्ट में जवाब नहीं दे सकीं। उन्होंने कहा, मामले की जांच कर रहे हैं। इसे कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अवमानना का दोषी मानते हुए उनसे सवाल किए। उन्हें एफिडेविट देना था, लेकिन वह नहीं दे सकीं।

अमरेंद्र सिंह ने बताया, कोर्ट आने से पहले फर्रुखाबाद के एडवोकेट अवधेश मिश्र के घर पर पुलिस पहुंच गई। उनके परिवार वालों को पीटा। घर में तोड़फोड़ की। कैमरे तोड़ दिए। पुलिस को शंका थी कि अवधेश मिश्रा ने ही प्रीति यादव को हाईकोर्ट रिट दाखिल करने के लिए भेजा है। अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि बिना एफआईआर के वकील के घर हमला हुआ।

अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में घोर हस्तक्षेप है। इस पर अदालत ने सवाल किया। इस प्रकरण को बुधवार को भी सुना गया।
एडवोकेट और उनके बेटे को कोर्ट परिसर से अरेस्ट किया था एडवोकेट अमरेंद्र ने बताया, मंगलवार शाम करीब 4 बजे हाईकोर्ट परिसर के बाहर अवधेश मिश्र और उनके बेटे को फर्रुखाबाद पुलिस ने जबरन अरेस्ट कर लिया। पुलिस दोनों को लेकर जाने लगी। इसके बाद फिर से हम लोगों ने यह मामला कोर्ट में रखा।

अदालत की वजह से अवधेश मिश्र और उनके बेटे छूट सके।

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