भागवत कथा के तृतीय दिवस,ध्रुव और सती चरित्र का हुआ वर्णन
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कायमगंज / फर्रूखाबाद :- क्षेत्र के गांव के मझोला रूटोल में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर वृंदावन से पधारे कथावाचक शास्त्री भुवनेश्वर पाठक ने ध्रुव और सती चरित्र का वर्णन किया।
आचार्य पाठक ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि ध्रुव राजा उत्तानपाद के पुत्र और भगवान विष्णु के महान तपस्वी भक्त थे। उन्होंने बचपन में ही कठोर तपस्या से भगवान विष्णु को प्राप्त किया था। आचार्य ने कहा कि यदि पांच वर्ष का बालक निष्ठा और दृढ़ विश्वास से भगवान को पा सकता है, तो आज के बच्चों और युवाओं को भी नियमित मंत्र जप और सच्ची भक्ति करनी चाहिए।
सती चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि सती ने अपने पति भगवान शिव का अपमान सहन नहीं किया और यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। उन्होंने इस चरित्र को पति-परायणता, निष्ठा और अटूट प्रेम का प्रतीक बताया। आचार्य ने यह भी कहा कि श्रद्धा से कथा सुनने से पापों का नाश होता है, आत्मा शुद्ध होती है और भक्त को हर संकट में भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है।
कथा के दौरान दिव्य सनातन रस में टीम ने शिव विवाह से जुड़े भजनों की प्रस्तुति दी। तीसरे दिन की कथा में मुख्य यजमान अनिल कुमार और उनकी धर्मपत्नी सुमन देवी, भाई महेश सक्सेना धर्मपत्नी ऊषा देवी का अहम योगदान रहा। इस अवसर पर आशीष सक्सेना, आदेश सक्सेना, सूर्यांश, अभी, विराट, अनन्या, अन्वी, गोपाल, विनेश, शिव आसरे, गोपाल आदि सहित भारी संख्या में श्रद्धालुओ ने भागवत कथा का रसपान किया।
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