शादी वाले घरों में एक – एक सिलेंडर की जुगाड़ मुश्किल
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फर्रुखाबाद :- जंग की तपिश के बीच सहालगों की शुरुआत भी हो गयी है। शादी वाले घरों में सबसे बड़ी समस्या गैस सिलेंडर की आ रही है। घरों में रिश्तेदारों के लिए भोजन की व्यवस्था जहां मुश्किल हो रही है तो वहीं दूसरी ओर शादी विवाह में बनने वाले पकवान के लिए एक एक सिलेंडर को जूझना पड़ रहा है। व्यवसायिक सिलेंडर की डिमांड बढ़ती जा रही है। मगर यह सिलेंडर भी पूरे नहीं मिल पा रहे हैं। पचास फीसदी सिलेंडर मिलना मुश्किल पड़ रहा है। ऐसी स्थितियों में शादी विवाह में अधिक गैस खपत वाले व्यंजनों में कटौती करनी पड़ रही है।
जंग की तपिश का असर घरेलू गैस पर सीधे तौर पर दिख रह है। जो हालात हैं उससे हर कोई प्रभावित है। अभी तक शादी विवाह में सिलेंडरों का इंतजाम बड़ी आसानी से हो जाता था। आस पास के लोग अपने अतिरिक्त घरेलू सिलेंडरों को मुहैया करा देते थे। मगर बुकिंग का जो 25 दिन का नया फार्मूला लागू किया गया है उससे अब लोग सिलेंडर देने से भी बच रहे हैं। ऐसे में व्यवसायिक सिलेंडरों पर निर्भरता बनी है मगर यह भी सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में नही मिंल पा रहे हैं। इससे उन लोगों को कठिनाइयों का सामना पड़ रहा है जिनके घरों में शादियां हैं। एक तो घरों में जमे रिश्तेदारों के लिए भोजन का इंतजाम कठिन हो रहा है दूसरा शादी वाले दिन में पर्याप्त मात्रा में सिलेंडरों की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। व्यवसायिक सिलेंडर लेना भी कोई आसान नहीं है। डिमांड यदि शादी वाले घर में दस की हो रही है तो 4 से 5 सिलेंडर ही बमुश्किल मिल पा रहे हैं। इसके लिए जिला पूर्ति अधिकारी की इजाजत जरूरी है। दिन के दिन रिश्तेदार और परिवारियों को बुलावाफर्रुखाबाद। शादी विवाह में लोग अब कई कई दिन पहले रिश्तेदारों और परिवारियों को इकट्ठा करने से भी बच रहे हैं। इसके पीछे भी गैस की समस्या एक कारण है। कारण है शादी वाले जो कार्ड वितरित हो रहे हैं वह दिन के दिन बांटे जा रहे हैं। यहां तक कि रिश्तेदारों और परिवारों को कार्ड दिन के दिन मिल रहे हैं। इसको लेकर किसी तरह की कोई शिकवा शिकायत होती है तो लोग अपने तरीके से रिश्तेदारों को समझाने का काम कर रहे हैं। पकवानों में कमी, रिश्तेदारों में कटौती फर्रुखाबाद। शादी विवाह में अब पहले जैसे पकवानों से तौबा की जा रही है। क्योंकि घरेलू गैस की जो समस्या है उससे भरपूर पकवान बनना संभव नहीं हो पा रहे हैं। कई शादी विवाह वाले घरों में मेहमानों में भी कटौती की जा रही है। शादी विवाह वाले घरों में यदि तीन कार्यक्रम हैं तो उसमें किसी को एक तो किसी को दूसरे प्रोग्राम में बुलाया जा रहा है। अधिक गैस की खपत वाले व्यंजनों में कटौती की जा रही है। इसमें खासतौर पर दूध, इमरती के अलावा फास्ट फूड के कई आइटम में कमीं लायी जा रही है। हलवाइयों से पहले ही तय कर लिया गया है कि जिन पकवानों में गैस कम लगे उन्हीं पकवानों को प्राथमिकता दें। इसी के आधार पर ही मेन्यू तैयार कराया जा रहा है। कई शादियों में तो बारात के लिए मेहमानों की संख्या में कमीं की गयी है। 200 से 300 की बारात ले जाने वाले लोग 100 से 150 लोगों की ही व्यवस्था कर रहे हैं।
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