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अमृतपुर में डीएम का सख्त एक्शन: लापरवाह लेखपाल व सचिव पर निलंबन की तलवार, जनता में जगी न्याय की उम्मीद

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– संपूर्ण समाधान दिवस में 114 शिकायतें, राजस्व विभाग सबसे आगे, लंबित मामलों पर अधिकारियों को फटकार

फर्रुखाबाद / अमृतपुर :-  तहसील सभागार में शनिवार को जिलाधिकारी अंकुर लाठर एवं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की अध्यक्षता में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस इस बार सख्ती और त्वरित कार्रवाई के लिए चर्चा में रहा। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में फरियादी पहुंचे और अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जिससे पूरे परिसर में गहमागहमी का माहौल बना रहा।

समाधान दिवस में कुल 114 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 2 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। प्राप्त शिकायतों में राजस्व विभाग की सर्वाधिक 48 शिकायतें रहीं, जबकि पुलिस विभाग की 22, विकास विभाग की 18, अन्य विभागों की 18, खाद्य एवं रसद विभाग की 5 तथा बिजली विभाग की 3 शिकायतें शामिल रहीं।

जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने छह माह से लंबित विरासत प्रकरण पर कानूनगो लाल बहादुर को कड़ी फटकार लगाई। वहीं जोगराजपुर निवासी राकेश द्वारा तालाब में कूड़ा डाले जाने की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

डीएम की सख्ती का असर साफ दिखा—कई अधिकारी उनके सामने आने से बचते नजर आए। भारी भीड़ के चलते एक समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जिसे मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, उप जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह और पुलिस प्रशासन ने संभालकर स्थिति नियंत्रित की।

सबसे बड़ी कार्रवाई ग्राम पिथनापुर निवासी मनोज कुमार के मेड़बंदी प्रकरण में देखने को मिली, जो 18 मई 2023 से लंबित था। मामले में लापरवाही पाए जाने पर लेखपाल उत्कर्ष दुबे को निलंबित करने के निर्देश दिए गए। पीड़ित का आरोप था कि न्यायालय के आदेश (धारा 24) के बावजूद पक्की नाप नहीं कराई गई थी।

इसी क्रम में फखरपुर निवासी रागिनी की शिकायत पर भी बड़ा फैसला लिया गया। सामुदायिक शौचालय की केयरटेकर रागिनी को जुलाई 2021 से मानदेय नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने पंचायत सचिव मानवेंद्र सिंह को निलंबित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध और निष्पक्ष निस्तारण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही निर्देश दिए कि न्यायालय के आदेशों के बाद मेड़बंदी जैसे मामलों को लंबित नहीं रखा जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि मनरेगा आईडी सक्रिय होते ही चकमार्ग से जुड़ी समस्याओं का समाधान वीडियो माध्यम से कराया जाएगा, जिसकी निगरानी मुख्य विकास अधिकारी करेंगे।

हालांकि कुछ शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को जांच पूरी कर आज शाम तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

डीएम की इस सख्त कार्रवाई से तहसील प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं आमजन के बीच यह संदेश गया है कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

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