शिवरईमठ में धार्मिक स्थल को लेकर फिर विवाद, पुलिस बल तैनात
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– शिवरईमठ गांव में ताला लगने की जानकारी के बाद जुटी भीड़, दोनों पक्षों में पुराने धार्मिक ढांचे को लेकर मतभेद जारी
कायमगंज / फर्रूखाबाद :- कोतवाली क्षेत्र के शिवरईमठ गांव में स्थित खान बहादुर बाबा सैयद की मजार को लेकर गुरुवार सुबह माहौल तनावपूर्ण हो गया। मजार पर ताला लगे होने की सूचना पर एक समुदाय के सैकड़ों ग्रामीण जमा हो गए। दोनों समुदायों में धार्मिक स्थल को लेकर विवाद उभर आया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कई थानों की फोर्स बुलाकर मोर्चा संभाला।
गुरुवार सुबह अचरा रोड पर दौड़ लगाते युवकों ने खान बहादुर बाबा सैयद की मजार पर ताला देखा, जिसके बाद यह बात गांव में फैल गई। देखते ही देखते एक समुदाय के ग्रामीण भारी संख्या में पहुंच गए और नाराजगी जताने लगे। इसी दौरान जब दूसरे समुदाय का एक व्यक्ति ताला खोलने पहुंचा तो भीड़ ने उसे दौड़ा लिया। सूचना मिलते ही सीओ राजेश कुमार द्विवेदी, कोतवाल अनुराग मिश्रा व इंस्पेक्टर लाइन आर्डर राजेश सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए कंपिल, शमशाबाद व मेरापुर थानों की फोर्स भी बुला ली गई। 
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्थान पहले शिव मंदिर था जिसमें घंटे लगे थे। उन्होंने कहा कि हाल ही में मजार पर उर्दू में टाइल लगाए गए हैं और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। साथ ही अब मजार का गेट बंद कर दिया गया है जो पहले हमेशा खुला रहता था। पुलिस ने ग्रामीणों की शिकायत पर दीवार पर लगी उर्दू में लिखी आयतों वाली टाइलें हटवा दीं। मौके पर पहुंचे तहसीलदार विक्रम सिंह चाहर ने राजस्व कर्मियों संग दोनों पक्षों की बात सुनी और रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी। विवाद के बाद भीड़ को पुलिस ने समझा-बुझाकर घर भेजा और मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि नई कोई भी निर्माण गतिविधि नहीं होने दी जाएगी।
बीते दिनों पहले मजार में घुसा था अधेड़, तोड़े थे टाइल और जालियां
बीते दिनों एक व्यक्ति मजार के भीतर घुस गया था और टाइलों व रेलिंग को क्षति पहुंचाई थी। इस मामले में मस्जिद के इमाम मशहूर की शिकायत पर गांव निवासी खड़क सिंह के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी को पुलिस ने शांति भंग में गिरफ्तार कर कार्रवाई की थी। गांव के अन्य छह लोगों पर भी कार्रवाई की गई थी।
प्रभारी निरीक्षक अनुराग मिश्रा ने बताया कि मजार पर तब से 24 घंटे पुलिस निगरानी जारी है और अब कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें चिन्हित कर पाबंद किया जाएगा।
दोनों पक्षों के अपने अपने तर्क
मुस्लिम समुदाय का दावा है कि यह मजार लगभग 700 साल पुरानी है और दोनों समुदाय के लोग यहां इबादत करते हैं।
हिंदू समुदाय का पक्ष का कहना है कि यह स्थान मूल रूप से शिव मंदिर था, जिसे षड्यंत्र कर बाद में मजार का रूप दे दिया गया।
प्रशासन करेगा अभिलेखीय दस्तावेजों की जांच
तहसीलदार ने बताया कि चकबंदी के समय से अभिलेखों में यह स्थान मकबरा के रूप में दर्ज है। पूरी स्थिति अभिलेखीय दस्तावेजों की गहन जांच के बाद स्पष्ट होगी। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
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