CHC शमसाबाद में भ्रष्टाचार का बोलबाला, प्रसूताओं को नहीं मिल रहा पौष्टिक आहार
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शमसाबाद / फर्रुखाबाद (महेश वर्मा) :- संवेदनहीनता की हद पार नवजात को जन्म देने बाली प्रसूताओं को नहीं मिलता पौष्टिक आहार रूखी सूखी दो रोटियों का सहारा।
जानकारी के अनुसार सी एच सी शमसाबाद में मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई एक तरफ सरकार मातृ-शिशु सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही बही , दूसरी तरफ प्रसव की पीड़ा से गुजरने वाली माताओं के हक के निवाले पर भ्रष्टाचार का डाका डाला जा रहा है।
जबकि नियमों के अनुसार प्रसव के बाद प्रसूता को गर्म दूध, फल, दाल, दलिया और पौष्टिक भोजन देना अनिवार्य है। अफसोस हकीकत में पौष्टिक आहार के नाम पर प्रसूताओं को रूखी-सूखी रोटी तथा आलू की सब्जी परोसी जा रही कभी पांच रुपये का पारले-जी बिस्कुट तो कभी दो ठंडी रोटिया । दूध के नाम पर 10 रुपये वाला छोटा पैकेट फलों के वितरण का तो अता पता ही नहीं नवजात को दूध पिलाने वाली माताएं भूख से तड़पने को मजबूर हैं। सूत्रों के अनुसार पोषण आहार का पूरा बजट कागजों में ही समा रहा है।
सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा
सुरक्षित मातृत्व के लिए नियम डिलीवरी के बाद मां और बच्चे को 48 घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाए। अफसोस प्रसव के महज पांच से 12 घंटे बाद ही प्रसूताओं की छुट्टी कर दी जाती है।जबकि महिला ठीक से खड़ी भी नहीं हो पाती, उसे भी घर का रास्ता दिखा दिया जाता सूत्रों की माने तो बताया गया है। डिस्चार्ज का कोई प्रमाण तक नहीं दिया जाता है। सरकारी एम्बुलेंस की सुविधा कागजों में है, हकीकत में प्रसूताओं को निजी वाहनों से घर जाना पड़ता है। हद तो तब हो जाती जब नवजात के आगमन की खुशी मना रहे गरीब परिवारों से डिलीवरी के एवज में अवैध वसूली का शिकार होना पड़ता है। वहीं सूत्र नाम ना छापने की शर्त पर बताते हैं कि उच्चाधिकारियों जब रूपए मांगते हैं तो हम लोग कोई अपने वेतन से तो देंगे नहीं।
यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, सिस्टम द्वारा जच्चा-बच्चा की सुरक्षा से खिलवाड़ है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी फर्रुखाबाद डॉ अंकुर लाठर व सीएमओ से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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