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कायमगंज में ANM-GNM के भरोसे चल रहे अस्पताल! प्रसूताओं की मौतों के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल

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कायमगंज / फर्रूखाबाद :- फर्रुखाबाद जनपद के कायमगंज कस्बे में संचालित कुछ निजी अस्पतालों को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। आरोप है कि बस अड्डे के आसपास स्थित कुछ अस्पतालों में पर्याप्त योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता के बिना उपचार और प्रसव कराए जा रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि पूर्व में इन अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। उनका आरोप है कि इन मामलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई तो की गई, लेकिन कुछ समय बाद संबंधित अस्पताल फिर से संचालित होने लगे।

इन अस्पतालों में कुछ अस्पतालों ने चिकित्सकों के नाम और डिग्री लिख रखीं हैं लेकिन पूरा कार्य ANM और प्राइवेट नर्स करती हैं। सूत्रों की मानें तो यह अप्रशिक्षित लोग एनेथिया के इंजेक्केशन भी लगा देते हैं जिस कारण किसी ना किसी महीने में अक्सर अप्रिय घटना प्रसूता की मौत हो जाती है, प्रशासन जागता है, दिखावे के लिए अस्पताल सील हो जाते हैं और चंद दिनों बाद ये मौत की दुकानें फिर से धड़ल्ले से चालू हो जाती हैं।

अधिकारियों के आते ही गिर जाते हैं शटर, कागजों पर ‘गायब’ हैं अस्पताल
इन तथाकथित अस्पतालों की चालाकी का आलम यह है कि न तो बाहर कोई वैध बोर्ड लगाया गया है और न ही पंजीकरण के नियमों का पालन हो रहा है। जब भी स्वास्थ्य विभाग की टीम या कोई बड़ा अधिकारी क्षेत्र में आता है, उसकी सूचना विभाग के दलाल अधिकारी से मिलते ही इन अस्पतालों के संचालक तुरंत शटर गिराकर भूमिगत हो जाते हैं।
बड़ा सवाल: क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को वाकई नहीं पता कि बस अड्डे के पास ऐसे अस्पताल चल रहे हैं, या फिर यह ‘जानबूझकर अनजान’ बने रहने का खेल है?
क्या किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है प्रशासन?
फर्रुखाबाद जनपद के स्वास्थ्य अधिकारी इस पूरे मामले से पूरी तरह बेखबर (या लापरवाह) बने हुए हैं। बार-बार सील होने के बाद भी इन अस्पतालों का दोबारा खुल जाना प्रशासनिक साठगांठ या बेहद ढीली कार्रवाई की ओर इशारा करता है। जनता अब सवाल उठा रही है कि क्या जिला प्रशासन किसी और गरीब की जान जाने या किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इन अस्पतालों को सिर्फ सील न किया जाए, बल्कि इनके संचालकों पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कर इन पर कार्यवाही की जाए।

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