प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज अपने दौरे के दौरान वृंदावन में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और बातचीत की।
राष्ट्रपति की इस यात्रा को लेकर पूरे मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुबह करीब 7:30 बजे सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच आश्रम पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू की सादगी देखते ही बन रही थी। प्रेमानंद महाराज ने राष्ट्रपति को ब्रज की महिमा और सेवा भाव का महत्व समझाया।
ब्रज दौरे पर हैं राष्ट्रपति
जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति नीम करोली बाबा के स्मारक का भी दौरा करेंगी। शाम को वे रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम में एक नए ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन करेंगी। अपनी यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति साध्वी ऋतंभरा द्वारा स्थापित संस्था वात्सल्य ग्राम में भी रुकेंगी, जो बुजुर्गों और अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए जानी जाती है। उनकी यात्रा 21 मार्च को गोवर्धन के दंगहाटी मंदिर में प्रार्थना के साथ समाप्त होगी, जिसके बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले सात मील की पारंपरिक गोवर्धन परिक्रमा करेंगी।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राष्ट्रपति के मथुरा और वृंदावन दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने सुरक्षा कारणों और आतंकी संगठनों के संभावित खतरों के मद्देनजर पूरे जनपद को ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मथुरा जनपद की सीमा में यह पाबंदी 19 मार्च को सुबह 10:00 बजे से लागू हो गई है और 21 मार्च को शाम 05:00 बजे तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान जिले में ड्रोन, पतंग या किसी भी प्रकार के गुब्बारे उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
वहीं, राष्ट्रपति मुर्मु 19 मार्च को उत्तर प्रदेश में पहुंचीं और अयोध्या, मथुरा और वृंदावन सहित प्रमुख धार्मिक शहरों का दौरा कर रही हैं, जहां वह समारोहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग ले रही हैं। अयोध्या पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने किया।
इससे पहले गुरुवार को राष्ट्रपति ने अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ‘श्री राम यंत्र’ स्थापित किया और वैदिक मंत्रों के बीच प्रार्थना की, जो मंदिर निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ‘श्री राम यंत्र’ को मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्थापित किया गया है, जो इसका अंतिम स्तर भी है, और पूर्णता का प्रतीक है। इस स्थापना के साथ ही मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण माना जाता है। धार्मिक अनुष्ठान दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के वैदिक विद्वानों द्वारा पुजारी गणेश्वर शास्त्री के मार्गदर्शन में संपन्न किए गए।
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